सेना भर्ती में दौड़ निकालने के लिए कई युवा स्टेरायड का इस्तेमाल करके दौड़ लगा रहे हैं। हालांकि अभी तक ऐसा कोई भी युवक आर्मी के हाथ नहीं आया है लेकिन भर्ती स्थल पर स्टेरायड के रैपर मिले हैं। इससे सेना ने युवाओं पर नजरें गड़ा दी हैं।
स्टेरायड दवाएं टेबलेट और इंजेक्शन के रूप में आती हैं। चिकित्सकों के मुताबिक, इनका प्रयोग करने के बाद कुछ समय के लिए व्यक्ति के अंदर मसल्स पॉवर बढ़ जाती है, जिससे व्यक्ति कोई भी काम उत्साह के साथ करता है। इनका प्रयोग पॉवर बढ़ाने के लिए जिम जाने वाले युवा भी कर रहे हैं। हालांकि इन दवाओं के साइड इफेक्ट भी हैं लेकिन फौरी तौर पर आर्मी भर्ती की दौड़ निकालने के लिए इनके बारे में जानने वाले युवा इनका प्रयोग कर रहे हैं। चार दिन से चल रही सेना भर्ती में पिछले दो दिनों में इन दवाओं के रैपर पड़े मिलने से यह साफ हो गया है। माना जा रहा है कि दौड़ से पहले चोरी छुपे मौका पाकर युवा यह दवा खा ले रहे हैं और इसके बाद वह दौड़ में शामिल हो जाते हैं। भर्ती करा रहे जवानों ने यह रैपर सेना के अफसरों को सौंप दी। बड़ी तादाद में रैफर मिलने से अफसर भी हैरान हो गए हैं और आगे की भर्ती में शामिल होने वाले युवाओं पर कड़ी नजर रखने की रणनीति बना ली गई है। संभव है कि अब स्टेरायड का इस्तेमाल करके भर्ती में शामिल होने वाले युवा पकड़े जाएं।
इंसेट...
डाक्टर की बात...
स्टेरायड दवाओं से मसल्स की पॉवर बढ़ जाती है और इससे थकान महसूस नहीं होती। इसका प्रयोग करने के बाद व्यक्ति एनर्जी फील करता है। इसकी जांच यूरिन से हो जाती है।
-डॉ. वीके धस्माना, वरिष्ठ चिकित्सक- जिला अस्पताल
वर्जन...
अभी ऐसा कोई युवा नहीं पकड़ा गया है फिर भी हम देख रहे हैं कि कोई स्टेरायड का प्रयोग करके भर्ती में दौड़ तो नहीं रहा है। अगर ऐसे मामले पाए जाते हैं तो कार्रवाई की जाएगी।
-कर्नल राजीव दीक्षित, निदेशक- सेना भर्ती