सेना भर्ती में शाहजहांपुर के युवा दम नहीं दिखा पाए। छह हजार में से 5670 अभ्यर्थी दौड़ और फिजिकल में ही फेल हो गए। सिर्फ 330 अभ्यर्थी मेडिकल के लिए क्वालीफाई कर सके। भरतौल मैदान में शुरू हुई सेना भर्ती का बृहस्पतिवार को पहला दिन था। सब से पहले शाहजहांपुर के युवाओं को मौका दिया गया। अभ्यर्थियों को सुबह पौने चार बजे से ही दौड़ के लिए टोकन दे दिए गए। दौड़ में पास होने के बाद लगभग एक हजार युवाओं को फिजिकल टेस्ट के लिए शाहजहांपुर रोड स्थित जाट रेजीमेंट के मैदान में लाया गया। यहां फिजिकल टेस्ट और प्रीमेडिकल में सिर्फ 330 अभ्यर्थी चुने गए। इनके सर्टिफिकेट की जांच भी मौके पर की गई।
सेना भर्ती के निदेशक कर्नल राजीव दीक्षित ने बताया कि चयनित 330 अभ्यर्थियों का शुक्रवार को मेडिकल चेकअप कराया जाएगा। उसमें पास होने के बाद ही इन्हें लिखित परीक्षा का मौका मिलेगा। पहले दिन की भर्ती प्रक्रिया सुबह साढ़े 11 बजे तक चली। उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड रीजन में पुलिस भर्ती के डिप्टी डायरेक्टर जनरल ब्रिगेडियर संदीप सहगल ने भी भर्ती स्थल पर पहुंचकर पूरी प्रक्रिया देखी।
शाहजहांपुर रोड पर रही भारी भीड़
करीब छह हजार अभ्यर्थियों के लौटने के कारण शाहजहांपुर रोड पर काफी भीड़ रही। सतर्कता के लिए भर्ती स्थल के अलावा सेटेलाइट पर पुलिस तैनात रही। पिछले साल अगस्त में हुई भर्ती में दलालों की भूमिका उजागर होने से सेना ने इस बार अधिक सतर्कता बरती। इसके लिए युवाओं को दलालों के चंगुल में न फंसने का संदेश देते बैनर लगाए गए और जगह-जगह सीसीटीवी कैमरे भी लगे रहे। भर्ती स्थल पर भी सीसीटीवी कैमरे की नजर में प्रक्रिया कराई गई।
सदर, फरीदपुर, बहेड़ी वालों को आज मौका
15 मई तक चलने वाली सेना भर्ती में शुक्रवार को बरेली की सदर, फरीदपुर और बहेड़ी तहसील के युवाओं को मौका दिया गया है। इन्हें सुबह चार बजे से पहले ही भरतौल स्थल पर बुलाया गया है।
शिक्षा विभाग की टीम भी डटी
सेना भर्ती में पिछली बार फर्जी शैक्षिक प्रमाणपत्र पकड़े जाने से इस बार भर्ती स्थल पर ही प्रमाणपत्रों की जांच की व्यवस्था की गई है। इसके लिए बेसिक और माध्यमिक शिक्षा विभाग की टीमों की ड्यूटी खंड शिक्षा अधिकारी नगर नरेंद्र सिंह पंवार के नेतृत्व में लगाई गई। इन्होंने संदिग्ध दिखने वाले प्रमाणपत्रों की जांच की।
फोटो----
दौड़ से चूक गया तो धरने पर बैठा
सेना भर्ती में कुछ सेकेंड से दौड़ से चूकने के बाद एक अभ्यर्थी ने खूब हंगामा किया। वह दौड़ शुरू कराने वाले जवानों पर खुद को पीछे खड़ा करने का आरोप लगाते हुए रोनेे लगा और धरने पर बैठ गया। बाद में उसे समझाबुझाकर उठाया गया।