बरेली। शहरीकरण और प्रदूषण की वजह से पक्षियों के लिए भी प्रतिकूल हालात पैदा हो रहे हैं। जिले में वन क्षेत्र न के बराबर है। ज्यादातर वेटलैंड अस्तित्व खो चुके हैं। इस कारण सर्दियों में आने वाले प्रवासी पक्षियों ने भी यहां से मुंह मोड़ लिया है। गौरैया ने भी दूरी बना ली है। गिद्ध की प्रजाति लगभग विलुप्त हो चुकी है। हालांकि, राज्यपक्षी सारस का कुनबा बढ़ रहा है।
26 और 27 जून 2023 को जिले की छह रेंज में 275 वयस्क और 48 अवयस्क सारस मिले थे। इस दौरान इनकी संख्या 16 ज्यादा दर्ज की गई थी। दिसंबर में कराई गई गणना के दौरान जिले में 342 सारस मिले हैं। इनमें 284 वयस्क और 58 अवयस्क सारस शामिल हैं।
प्रवासी पक्षियों की 15 में से सिर्फ तीन प्रजातियां बचीं
तीन दशक पहले तक सर्दियों में प्रवासी पक्षियों की 15 से ज्यादा प्रजातियां जिले में आती थीं। अब दो-तीन प्रजातियों के ही प्रवासी पक्षी दिखते हैं। रामगंगा के किनारे के वेटलैंड भी प्रदूषित हो गए हैं। इसके अलावा यहां मानव का दखल बढ़ गया है। अब यहां भी प्रवासी पक्षी नहीं आते।
वर्जन
शहरीकरण, प्रदूषण, औद्योगीकरण का पक्षियों की कई प्रजातियों पर बुरा असर पड़ा है। वेटलैंड दूषित होने के कारण सर्दियों में अब प्रवासी पक्षी भी नहीं आते। पक्षियों को दो वर्गों में रखा जाता है। एक रेजीडेंस पक्षी जो हमारे बीच ही रहते हैं और दूसरे प्रवासी पक्षी जो समय-समय पर आते हैं। सुरक्षित माहौल व भोजन की कमी तथा शोर-शराबा इनको हमसे दूर कर रहे हैं। - डॉ. काजल दास गुप्ता, पक्षी विशेषज्ञ
पक्षियों के लिए उपयुक्त माहौल बनाना सभी की जिम्मेदारी है। पक्षी हमारे ईको सिस्टम का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। अगर हम उनके संरक्षण के लिए कुछ नहीं कर सकते तो उनको परेशान भी न करें। ध्वनि प्रदूषण व तेज रोशनी का भी पक्षियों के प्रजनन पर असर पड़ता है। अगर हमारे बीच पक्षी रहेंगे, तब ही हमारा ईको सिस्टम सुरक्षित रहेगा।- अनिल साहनी, पक्षी प्रेमी
वर्जन
सारस की संख्या बढ़ी है। आने वाले दिनों में अन्य प्रजातियों की संख्या भी बढ़ेगी। जिले में वन भूमि कम है। पक्षियों के संरक्षण के लिए अभियान चलाए जा रहे हैं। वेटलैंड की संख्या घटने के कारण अब प्रवासी पक्षी कम आते हैं। - कमल कुमार, एसडीओ, सामाजिक वानिकी