स्कूल में पढ़ते बच्चे (सांकेतिक तस्वीर)
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सर्व शिक्षा अभियान के तहत बच्चों को स्कूल में मिलने वाले मिड डे मील (एमडीएम) के दूध में पानी की मिलावट रोकने में खुद शासन ने असमर्थता जता दी है। धांधली के कई मामले सामने आने के बाद शासन ने एमडीएम की सूची से दूध को हटाने का निर्णय लिया है। सूबे के सभी बीएसए को दूध के स्थान पर अन्य विकल्प चुनने के निर्देश दे दिए गए हैं।
मिड डे मील के तहत पकाए जाने वाले खाने में अक्सर खामियों की शिकायत रहती है। इन आरोपों पर अक्सर अधिकारियों की सांठगांठ के चलते पर्दा डाल दिया जाता है। करीब चार साल पहले दूध में दोगुने से ज्यादा पानी की मिलावट की पुष्टि हुई थी। पूर्वांचल 2016 में एमडीएम से दूध वितरण रोक दिया गया था।
करीब चार साल तक दूध वितरण न होने से बच्चों को पौष्टिक आहार न मिलने से सालाना होने वाले वजन दिवस पर कुपोषित बच्चों की संख्या में वृद्धि होने लगी थी। इसके बाद शासन ने 2019-20 के नए शिक्षा सत्र से एमडीएम में दूध वितरण के निर्देश दिए। नया सत्र शुरू हुए अभी चार माह भी नहीं बीते कि फिर दूध में मिलावट, वितरण और रखरखाव में लापरवाही की शिकायतें मिलीं जो जांच में सही पाई गई हैं। शासन ने अब सूची से दूध को हटाने का निर्णय लिया है।
गोपनीय जांच में दूध में मिला ‘खेल’
तमाम जिलों से शिकायत मिलने के बाद शासन ने गोपनीय जांच कराई तो आंकड़े चौंकाने वाले मिले। मध्याह्न भोजन प्राधिकरण के निदेशक विजय किरन आनंद के जारी पत्र के अनुसार निरीक्षण में दूध की उपलब्धता में कमी, रखरखाव में दिक्कत, वितरण में कठिनाई और दूध में गुणवत्ता नहीं पाई गई है। उन्होंने बीएसए को दूध की गुणवत्ता की गंभीरता से जांच कराने और शुद्ध दूध उपलब्ध न होने पर दूध की जगह अन्य पौष्टिक आहार का विकल्प चुनकर रिपोर्ट दो दिन में देने के निर्देश दिए हैं।
कीड़े मिलने का वीडियो वायरल
करीब हफ्ते भर पहले 9 अगस्त को भुता के खटेली जूनियर हाई स्कूल के मिड डे मील के खाने में पके हुए चावल में भारी तादाद में कीड़े मिलने का वीडियो वायरल हुआ। शिक्षकों ने कार्रवाई की मांग की। बीएसए से कई बार शिकायत के बाद भी अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई।