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शराफत मियां के कुल में उमड़े अकीदतमंद

Thu, 24 Dec 2015 02:10 AM IST
बरेली
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बरेली। हजरत शाह शराफत अली मियां के कुल के साथ बुधवार को उर्स-ए-शराफती पूरा हो गया। आखिरी तकरीब में शिरकत करने के लिए अकीदतमंदों की भीड़ उमड़ पड़ी। शाहबाद और आस-पास से जुड़े तमाम मोहल्लों में शराफत मियां के दीवाने ही नजर आ रहे थे।
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सुबह से ही जायरीन की भीड़ जुटनी शुरू हो गई थी। 11 बजते ही हर कदम अपनी-अपनी जगह पर थम गए। इस बीच कुल की रस्म शुरू हुई और कुरान की आयतें फिजाओं में गूंजी तो अकीदतमंदों के हाथ बंध गए। आंखें बंद हुई और सिर अदब से झुक गए। आसपास की छतें भी महिलाओं से भर गई थीं। कुल शरीफ के बाद साहिबे सज्जादा शाह मोहम्मद सकलैन मियां हुजूर ने मुल्क और अवाम की सलामती के लिए खास दुआ की। इससे पहले सुबह कुरान ख्वानी हुई। सुबह आठ बजे से तकरीरी जलसा शुरू हुआ। इसमें दीन के साथ कौमो मिल्लत की बातें भी की गईं।

जुबानी दहशतगर्दी के खिलाफ उठी आवाज 
बरेली। हजरत शाह शराफत मियां के कुल से पहले खानकाही मेहमानखाने में जलसे का आयोजन किया गया। इसमें उलमा ने जुबानी दहशतगर्दी के खिलाफ आवाज उठाते हुए कहा कि हर मजहब इज्जत के लायक है। मिस्र की जामिया अजहर यूनिवर्सिटी से फारिग मुफ्ती फहीम सकलैनी ने कहा कि आज मुसलमानों को कमजोर और बदनाम करने के लिए इस्लाम मुखालिफ साजिश की कोशिश हो रही है। हर तरफ जुबानी दहशतर्गी के जहर घोले जा रहे हैं, ऐसे में मुसलमानों को चाहिए कि वह सब्र से काम लें और जुबानी दहशतगर्दी से बचें। साथ ही हुकूमत से मांग की है कि ऐसी बयानबाजी पर रोक लगे क्योंकि हर मजहब एहतेराम (सम्मान) के लायक है।
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प्रोफेसर महमूदउल हसन ने अजमते रसूल पर बयान करते हुए कहा कि आपने तमाम दुनिया को इंसानियत, मोहब्बत और भाईचारे का पैगाम दिया। इसलिए हमें भी सुन्नते रसूल पर अमल करते हुए जिंदगी गुजारना चाहिए। इस मौके पर मुंतखब अहमद नूर, मुमताज मियां, मुख्तार सकलैनी तिलहरी, मौलाना अलाउद्दीन अशरफी, मौलाना नूर मोहम्मद आदि मौजूद रहे।  
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