दमखोदा ब्लाक में तीन साल के दौरान मनरेगा के 1.57 करोड़ के घपले का मामला ज्यादा तूल पकड़ने पर जिला विकास अधिकारी ने आरोपी पांचों पंचायत सचिवों का जवाब लेकर नए सिरे से आरोप और कार्रवाई प्रस्तावित करने के लिए संयुक्त विकास आयुक्त को फ ाइल भेज दी है। जिसमें कहा गया है कि आपकी आडिट टीम ने दमखोदा ब्लाक के 40 से अधिक गांवों में पांच पंचायत सचिवों की ओर से रिकार्ड न दिखाने तथा अन्य घपलों की आशंका व्यक्त की थी। उसी के आधार पर पांच सचिव पिछले माह निलंबित किए गए। जिन्हें दो जून को बहाल कर दिया गया था। बहाली से पहले उनका जो जवाब आया है, वह और उससे पहले आपकी आडिट टीम की रिपोर्ट के आधार पर अब क्या कार्रवाई बनती है, उस पर अपना पक्ष रखें। जिसके आधार पर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जा सके।
एक सप्ताह पहले तक विकास भवन के अधिकारी आडिट रिपोर्ट को हल्के में ले रहे थे। पिछले सप्ताह कमिश्नर प्रमांशु कुमार ने फैक्ट फाइंडिंग रिपोर्ट मांगी थी। जिस पर डीएम गौरव दयाल ने सीडीओ को जांच गठित करने के आदेश किए थे। सोमवार को केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री बीरेंद्र सिंह बरेली आए थे। उनसे जन चेतना मंच के पदाधिकारियों ने आडिट रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई कराने का अनुरोध किया था। मंत्री ने आडिट रिपोर्ट में दमखोदा ब्लाक के गांवों में मनरेगा से कराए गए कामों के घपले को गंभीरता से लिया और केंद्रीय मानीटरिंग सेल से जांच कराने के साथ-साथ जरूरत पड़ने पर केंद्रीय टीम भेजने का आश्वासन दिया। इस प्रकरण के केंद्रीय मंत्री तक पहुंचने से विकास भवन में मंगलवार को पूरे दिन गहमा गहमी रही। उसी दौरान डीडीओ ने आडिट में बताए गए घपले के आरोपों का पंचायत सचिव से मिले जवाब को शामिल करते हुए फाइल जेडी को भेज दी है।
डीएम का कोट
‘आडिट रिपोर्ट के आधार पर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई तय है। पंचायत सचिवों का पक्ष जेडीसी के पास भेजा है। जिसके आधार पर अब तय हो जाएगा कि इन सचिवों का कितना दोष है, उसी के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।’ गौरव दयाल, डीएम
गरइया में 18 लाख के गबन में एफआईआर के आदेश
क्रासर
पूर्व प्रधान, सचिव, रोजगार सेवक और तकनीकी सहायक नामजद होंगे
दमखोदा के बीडीओ के खिलाफ कार्रवाई के लिए शासन को लिखा गया
अमर उजाला ब्यूरो
बरेली। मुख्य विकास अधिकारी शिव सहाय अवस्थी ने मनरेगा के 18 लाख रुपये निकालकर काम न कराने और उस रकम को हड़पने के मामले में दमखोदा ब्लाक के गरगइया गांव के पूर्व प्रधान, पंचायत सचिव करन सिंह, रोजगार सेवक और तकनीकी सहायक के खिलाफ एफआईआर के आदेश कर दिए हैं। यह कार्रवाई जिला ग्राम्य विकास अभिकरण के परियोजना निदेशक की जांच रिपोर्ट के आधार पर की गई है। इस मामले में बीडीओ उमाशंकर को भी दोषी माना गया है, वह इस समय दूसरे जिले में तैनात हैं, इसलिए उनके खिलाफ कार्रवाई के लिए प्रमुख सचिव (ग्राम्य विकास) को लिखा गया है।
यहां तैनात सचिव करन सिंह को 20 गांव दिए जाने पर भी आडिट रिपोर्ट में सवाल उठाए गए थे। इस गांव में मनरेगा से काम कराने के लिए पिछले वित्तीय वर्ष में 18 लाख रुपये से अधिक रकम निकाली गई थी। मनरेगा कर्मियों के फर्जी मस्टरोल भरे गए और उनके नाम के खाते खोलकर धनराशि भी हड़प ली गई थी। इस राशि से पोखर, तालाब का सौंदर्यीकरण, चकरोड और खरंजा निर्माण का उल्लेख किया गया था। निर्माण पूरा होने की रिपोर्ट भी भेज दी गई थी। जिसकी डीएम ने पीडी से जांच कराई । जिसमें बिना काम के धनराशि हड़पने का खुलासा हुआ था। उसी आधार पर इन कर्मियों के खिलाफ एफआईआर के आदेश किए गए हैं।
10 लाख का काम कराने वालों की जांच होगी
मुख्य विकास अधिकारी शिव सहाय अवस्थी ने 10 लाख या उससे अधिक राशि का गोलमाल करने वाली ग्राम पंचायतों में जिला स्तरीय अधिकारियों से सत्यापन कराने का फैसला लिया है। जिले में ऐसी दो दर्जन ग्राम पंचायतें चिह्नांकित की गईं हैं, इन ग्राम पंचायतों में सत्यापन के लिए जिला स्तरीय अधिकारी नामित कर दिए हैं। इन सभी से दस दिन के अंदर सत्यापन रिपोर्ट मांगी गई है। उन्हीं रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।