आपदा में अवसर जैसा रहा अमेरिकी टैरिफ का बढ़ना
निर्यातकों के मुताबिक, पिछले वर्ष जून-जुलाई में ट्रंप टैरिफ लागू होने से कारोबार 95 फीसदी प्रभावित हुआ था। लिहाजा, उद्यमी दूसरे देशों में निर्यात की संभावना तलाशने निकलने लगे। जरी के लिए दुबई सेंटर प्वाइंट बना। मेंथॉल के लिए फिलीपींस, सिंगापुर और चीन की ओर बढ़े। मीट कारोबारी खाड़ी प्रदेशों की तरफ चले गए। बासमती चावल के कारोबारी देश में ही खपत बढ़ाने में जुट गए। लिहाजा, करीब छह माह का संकट आपदा में अवसर भी माना जा रहा है। पुराने के साथ नए देश में निर्यात के सकारात्मक असर की उम्मीद है।
वर्षवार बरेली मंडल से निर्यात के आंकड़े और गिरावट
उद्योग विभाग के आंकड़ों पर गौर करें तो बरेली मंडल से वित्त वर्ष 2021-22 में 10.15 अरब, 2022-23 में 9.56 अरब, 2023-24 में 5.56 अरब और 2024-25 में 4.19 अरब रुपये के उत्पाद निर्यात हुए। वर्ष 2022-23 से 2023-24 के दौरान सालभर में ही निर्यात में चार अरब रुपये की गिरावट दर्ज की गई। वहीं, ट्रंप टैरिफ लागू होने के बाद निर्यात का आंकड़ा बीते वर्ष 170 करोड़ रुपये पर ही सिमट गया था। इससे बरेली का सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) भी प्रभावित होने का अनुमान है।
सुदीप राजगढ़िया और दिनेश गोयल
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निर्यातक गौरव मित्तल और नईम अहमद
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उद्यमी व मेंथॉल निर्यातक गौरव मित्तल ने कहा कि कुछ वक्त के लिए आए संकट के अब टलने के आसार हैं। लेकिन, इस मुश्किल की घड़ी ने काफी कुछ सिखाया और कारोबार को बढ़ाने के लिए नए विकल्प तलाशने का मौका दिया, जो सकारात्मक रहा।
बहेड़ी के राइस मिल एसोसिएशन के अध्यक्ष नईम अहमद ने बताया कि टैरिफ घटने से भारतीय चावल अमेरिकी बाजार में कम मूल्य पर पहुंचने से निर्यात बढ़ेगा। अबतक करोड़ों के निर्यात पर अंकुश लगने से निर्यातक परेशान रहे। चावल उद्योग बिक्री काफी कम रह गई थी।