बरेली। तमाम कवायदों के बावजूद नसबंदी को लेकर पुरुषों का डर खत्म नहीं हो रहा। वे परिवार नियोजन के अन्य साधनों के प्रति भी लापरवाह हैं। जबकि, महिलाएं पूरी जिम्मेदारी निभा रहीं हैं। पिछले एक साल के आंकड़ों पर नजर डाले तो 4,116 महिलाओं के सापेक्ष सिर्फ 16 पुरुषों ने ही नसबंदी कराई। महिलाओं की जागरूकता से ही जिले की प्रजनन दर 3.4 से घटकर 2.3 फीसदी पर आ टिकी है।
स्वास्थ्य विभाग की ओर से जारी रिपोर्ट के अनुसार परिवार नियोजन के साधनों का प्रयोग करने का आंकड़ा साल दर साल बढ़ रहा है। जनसंख्या नियंत्रण के लिए सरकार की ओर से तमाम योजनाओं का संचालन किया जा रहा है, पर पुरुष इसमें रुचि नहीं दिखा रहे। परिवार नियोजन के स्थायी साधनों को अपनाने में पुरुषों का आंकड़ा बेहद निराशाजनक है।
बरेली में वित्तीय वर्ष 2024-25 में निर्धारित लक्ष्य 50 के सापेक्ष अब तक सिर्फ 16 पुरुषों ने ही नसबंदी कराई है। जबकि, 4,450 लक्ष्य के सापेक्ष 4,116 महिलाओं ने नसंबदी कराई है। इस लिहाज से अफसर 91.46 फीसदी लक्ष्य हासिल करने का दावा कर रहे हैं, लेकिन इसमें पुरुषों का योगदान बेहद कम है।
भ्रांतियों में जकड़े हैं पुरुषमनोचिकित्सक डॉ. आशीष के मुताबिक करीब 99 फीसदी पुरुष भ्रामक सूचनाओं का शिकार हैं। नसबंदी तकलीफदेह होने, जननांग संबंधी कैंसर का खतरा बढ़ने, डिमेंशिया की चपेट में आने समेत अन्य गलतफहमियां हैं। जबकि, नसबंदी से कोई क्रिया प्रभावित नहीं होती। बल्कि, एचआईवी, सिफलिस, हेपेटाइटिस जैसे रोगों से सुरक्षा मिलती है।
परिवार नियोजन के लिए चल रहीं योजनाएं
बरेली प्रदेश के उच्च प्रजनन दर वाले जिलों की सूची में शामिल है। सीएमओ डॉ. विश्राम सिंह के मुताबिक नसबंदी कराने पर पुरुषों और महिलाओं को आर्थिक मदद दी जाती है। सास, बेटा-बहू सम्मेलन, बॉस्केट ऑफ च्वॉइस समेत आशा, एएनएम के जरिये गांव और शहरी क्षेत्र में लोगों को जागरूक किया जा रहा है। प्रत्येक स्वास्थ्य केंद्र पर परिवार नियोजन के साधन निशुल्क उपलब्ध हैं। अमर उजाला ब्यूरो