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Bareilly News: मेगा फूड पार्क की बुझी बत्ती, सड़कें जर्जर बाढ़ के डर से उद्यमी पीछे खींच रहे कदम

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बरेली। बहेड़ी के मुकर्रमपुर गांव में 257 एकड़ भूमि पर मेगा फूड पार्क बसाने की कवायद अब तक धरातल पर नहीं उतर सकी है। पार्क के आबाद होने से पहले ही यहां की सड़कें जर्जर हो गई हैं। पांच माह से स्ट्रीट लाइटें नहीं जलतीं। किच्छा नदी की बाढ़ के डर से उद्यमी कदम पीछे खींच रहे हैं।
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उपलब्ध 105 में से 94 भूखंड उद्यमियों को आवंटित किए जा चुके हैं, पर पांच साल में सिर्फ छह खाद्य प्रसंस्करण इकाइयां ही स्थापित हो सकी हैं। इनमें से भी पांच में ही उत्पादन हो रहा है। उद्यमियों के मुताबिक, इकाई लगाने में मूलभूत सुविधाओं की अड़चन है।
वर्ष 2016-17 में उप्र राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण ने उप्र-उत्तराखंड की सीमा पर मेगा फूड पार्क की स्थापना की कवायद शुरू की। नक्शे के आधार पर प्लॉट काटे। सड़क, नाला, पार्क, कन्वेंशन शॉप समेत अन्य निर्माण वर्ष 2020 तक पूरे हुए। वर्ष 2021 में भूखंड आवंटन की प्रक्रिया शुरू हुई। पांच निवेशकों ने उद्योग लगाने की प्रक्रिया शुरू की। इसी बीच इन्वेस्टर्स समिट में डेयरी क्राफ्ट कंपनी ने 110 करोड़ के निवेश का करार किया, पर निर्माण के दौरान जलभराव की अड़चन रही।
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दरअसल, बारिश के दौरान किच्छा नदी के उफान से बाढ़ का पानी फैक्टरी में घुस रहा था। इससे मेगा फूड पार्क बसाने की कवायद सुस्त पड़ गई। वर्ष 2023 में बाढ़ से बचाव की कवायद शुरू हुई। बाउंड्री और बैरियर बनाए, पर जलभराव की समस्या का समाधान नहीं हुआ।
पार्क में कटान को रोकने के लिए बरेली के सीमा क्षेत्र में भूमि खरीदकर यूपीसीडा ने तटबंध का निर्माण किया। इससे बाढ़ पर काफी हद तक अंकुश लगा, पर कटान जारी रही। अब किच्छा की ओर स्टोन पिचिंग प्रस्तावित है। इसके लिए नदी के किनारे 25 मीटर चौड़े और 2,700 मीटर लंबाई में भूमि उपलब्धता की मांग बाढ़ खंड ने की है।
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