मीरगंज। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) पर मनमानी जारी है। यहां दवाओं का स्टाॅक पर्याप्त है, लेकिन अधिकांश मरीजों को बाहर की दवाएं लिखी जा रही हैं। इससे मरीजों की जेब पर असर पड़ रहा है। तीन दिनों में यहां पहुंचे कुछ मरीजों ने यह बात बताई।
सरकार ने स्पष्ट आदेश जारी कर रखा है कि सरकारी अस्पतालों में जरूरी दवाएं मरीजों को मुफ्त में दी जाएं, लेकिन मीरगंज सीएचसी में अस्पताल के पर्चे के साथ डॉक्टर मरीजों को एक छोटी सी पर्ची थमाते हैं, जिस पर बाहर के मेडिकल स्टोर से दवा खरीदने के लिए निर्देश होता है। एक कर्मचारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि सीएचसी पर दवाओं का स्टाॅक काफी है। इसके बाद भी डॉक्टरों के बीच होड़ मची है। कौन ज्यादा दवा बाहर से लिखे और ज्यादा कमीशन कमाए। शाम को मेडिकल स्टोर्स से कमीशन का बंटवारा होता है।
मीरगंज निवासी समाजवादी पार्टी विधानसभा प्रभारी सुरेश गंगवार ने मामले में प्रशासनिक अधिकारियों से कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि इसमें उच्च स्तरीय जांच की जाए। डॉक्टरों, मेडिकल स्टोर मालिकों आदि की मिलीभगत से यह खेल चल रहा है। यह मामला केवल भ्रष्टाचार का नहीं, बल्कि हजारों गरीब मरीजों की जान से खिलवाड़ का है। संवाद
इलाज तो दूर, मजबूरी तक नहीं सुनते
मरीज अमन ने बताया कि मुझे खांसी और बुखार है। मैंने डॉक्टर से कहा कि मेरे पास पैसे नहीं हैं, फिर भी उन्होंने बाहर की दवा लिख दी। इलाज तो दूर, डॉक्टर ने मेरी मजबूरी तक नहीं सुनी। मरीज समीर ने बताया कि मेरे पास बिल्कुल पैसे नहीं थे। डॉक्टर से मना किया, लेकिन फिर भी उन्होंने मेडिकल से दवा लेने को कहा। मजबूरी में उधार लेकर दवा खरीदनी पड़ी। इस तरह मंगलवार को पहुंचे अजित, मुन्नी, अनिता ने यह बात बताई।
कुछ मरीज स्वयं बाहर की दवाइयां लिखवाते हैं। डाॅक्टर अपनी मर्जी से ज्यादातर दवाइयां लिखते हैं, तो जानकारी कर कार्रवाई की जाएगी।
-विनय कुमार पाल, सीएचसी अधीक्षक