बरेली। स्वास्थ्य केंद्रों पर रविवार को लगने वाला जन आरोग्य मेला रस्म अदायगी बनकर रह गया है। मरीजों को बेहतर इलाज मुहैया कराने की शासन की मंशा को जिम्मेदार ही पलीता लगा रहे हैं।
रविवार को अमर उजाला टीम ने इसकी पड़ताल की तो पता चला कि जिस चिकित्साधिकारी के पास दो केंद्रों का प्रभार था, वह किसी केंद्र पर नहीं पहुंचीं। कहीं फार्मासिस्ट ने मरीज देखे तो कहीं सहायक स्टाफ ने दवाएं वितरित कीं।
टीम दोपहर करीब एक बजे नगरीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र हरूनगला पहुंची। यहां स्टाफ नर्स, फार्मासिस्ट, एएनएम और आशा कार्यकर्ता मौजूद रहीं। चिकित्साधिकारी की कुर्सी खाली मिली। स्वास्थ्यकर्मियों के मुताबिक वह अवकाश पर हैं।
लिहाजा, जोगी नवादा स्वास्थ्य केंद्र की चिकित्साधिकारी डॉ. चार्ली को प्रभार मिला है। वह सुबह आकर चली गईं। दोपहर एक बजे तक फार्मासिस्ट ने 17 मरीजों को देखा और उनको दवाएं दीं।
दोपहर 1.40 बजे टीम जोगी नवादा स्वास्थ्य केंद्र पहुंची। यहां भी चिकित्साधिकारी मौजूद नहीं थीं। सहायक स्टाफ सुमित ने बताया कि हरूनगला केंद्र का प्रभार होने की वजह से वह सुबह से आई ही नहीं। डॉक्टर न होने की वजह से दोपहर दो बजे तक कोई मरीज भी इलाज के लिए नहीं पहुंचा। अमर उजाला ब्यूरो