कुर्बानी के नियम और सामाजिक सद्भाव
शहाबुद्दीन रज़वी बरेलवी ने जोर दिया कि कुर्बानी करते समय दूसरे धर्मों के लोगों की भावनाओं का सम्मान किया जाए। उन्होंने कहा कि कुर्बानी का दिन इस्लाम के अनुयायियों को किसी को तकलीफ न देने का सबक सिखाता है। प्रतिबंधित जानवरों की कुर्बानी न करने का भी निर्देश दिया गया। कुर्बानी के दौरान उत्पन्न होने वाले किसी भी विवाद को शांतिपूर्ण ढंग से निपटाने की बात कही गई। उन्होंने उच्च अधिकारियों को जानकारी देने की भी सलाह दी।
नमाज और भीड़ प्रबंधन
मौलाना ने कहा कि सड़कों पर शोर-शराबे और यातायात के कारण यह संभव नहीं है। आबादी बढ़ने और मस्जिदों में जगह की कमी होने पर उन्होंने एक ही मस्जिद या ईदगाह में एक से अधिक जमातें करने का सुझाव दिया। कहा कि शरीयत के अनुसार, एक इमाम के बाद दूसरा इमाम दूसरी जमात करा सकता है। इस व्यवस्था से भीड़ की समस्या हल हो सकती है और सभी लोग शांति से नमाज अदा कर सकते हैं।