बरेली।
गोरखपुर में ऑक्सीजन की कमी से 22 नवजात की मौत के बाद भी जिला अस्पताल में इसको लेकर कोई अलर्ट नहीं दिखा। इमरजेंसी वार्ड में झोले में टंगे ऑक्सीजन मास्क गंदगी से पटे हैं। इन पर धूल लगी हुई है। सफाई के दौरान इन्हें साफ भी नहीं किया जाता है। अगर किसी सांस के मरीज को यह ऑक्सीजन मास्क लगा दिया जाए तो उसे एलर्जी होनी तय है। जनरल वार्ड में भी यही हाल है। बच्चाें के वार्ड में ऑक्सीजन की सप्लाई भी पाइप लाइन के माध्यम से दी गई है। अस्पताल में सौ लीटर के सिलिंडर से पाइपलाइन द्वारा गैस दी जाती है। छोटे- छोटे 50 सिलिंडर अलग से हैं। बड़ा सिलिंडर समाप्त होने पर तुरंत छोटे सिलिंडर से सप्लाई दी जाती है।
इमरजेंसी वार्ड में ऑक्सीजन की सप्लाई पाइप लाइन के माध्यम से होती है। सेंट्रल रूम इमरजेंसी के बाहर बनाया गया है। यहां ऑक्सीजन पर्याप्त है और सभी बेड के पास मास्क हरे रंग के झोले में टंगे हुए हैं ताकि इनमें धूल न जाए। बेड नंबर आठ पर लगे ऑक्सीजन मशीन के पास से मास्क गायब है। यहां के मरीज को ऑक्सीजन की जरूरत पड़ती है तो उन्हें सिलेंडर से ऑक्सीजन दी जाती है। इसी तरह दो और बेड से मास्क गायब है।
विज्ञापन
न्यू सर्जरी वार्ड में मरीजों की भर्ती शुरू हो गई है। यहां सर्जरी के साथ अन्य मरीज भी भर्ती होते हैं। ऑक्सीजन सप्लाई के लिए पाइप लाइन तो वार्ड में डाल दी गई है लेकिन इनमें न तो मशीन लगी है और न ही कोई मास्क है। हालांकि स्टाफ का कहना है कि सर्जरी वार्ड में मरीजों को ऑक्सीजन की जरूरत कम पड़ती है लेकिन इमरजेंसी के लिए यहां सिलेंडर मौजूद है।
जन की कोई कमी जिला अस्पताल में नहीं है। सभी को अलर्ट कर दिया गया है। सफाई को लेकर जो दिक्कत है उसे ठीक कराया जाएगा। इमरजेंसी सिलिंडर भी पर्याप्त हैं।
डॉ. केएस गुप्ता, प्रमुख अधीक्षक