दो साल नशीली दवा के आरोप मे बरी हो कर अरब से मसीत खां अपने घर पदारथपुर वापस आए तो परिजनों की आंखे छलक उठीं। सभी उनसे चिपट कर रो पड़े। काफी देर उनके घर का माहौल भावुकता से भरा रहा। आस पड़ोस के लोग भी इस खुशी के पल को बांटने उनके घर पहुंच गए।
मसीत खां डेढ़ साल पहले 22 अगस्त 2015 को हज करने गए थे। उनके गांव के एक रिश्तेदार ने वहां रह रहे अपने परिजन को डाक्टर की लिखी नींद की दवाई पहुंचाने के लिए दी थी। जो वहां सर्च के दौरान पुलिस को मिली। इस पर उन्हें हिरासत में ले लिया गया और बाद में शक की बुनियाद चार महीना 20 जेल में रहना पड़ा था। मसीत खां ने बताया कि वहां पर उनका कोई नहीं था यहां ठिरिया के रहने वाले शराफत खां ने उनकी बहुत मदद की। जिनके वह एहसानमंद हैं। उन्होंने ने वहां सऊदी के रहने अपने वकील दोस्त अबु साबी से केस लड़वाया 17 जनवरी 16 को बेल हो पाई। तब से वह शराफत के घर पर ही रहते रहे। उन्हीं के साथ हर तारीख पर भी जाते थे। 15 दिन पहले ही केस के बसी हो पाए। वीजे में 15 दिन लग गए। अब शराफत ही अपने साथ बरेली तक लेकर आए। अल्ला का शुक्र है वह अपने घर पहुंच गए।
इधर उनको साथ लेकर आए शराफत खां का कहना है कि उन्होंने जो किया वह इंसानियत के नाते किया। किसी परेशान इंसान की परदेश में मदद करना सवाब का काम है वहीं किया। यह काम अल्ला को उनके हाथों कराना था सो हो गया। उन्होंने यह भी बताया कि मसीत खां जब तक उनके घर पर रहे अपने घर की फिकर में बेचैन दिखे। वह रोज अपने परिवार में फोन किया करते थे। उन्होंने बताया कि उनके साथ दोस्त जाहिद अली भी आएं हैं। यहां दिल्ली एयर पोर्ट पर लेने पहुंचे मसीत खां के बेटे हसनैन खां मिले थे वहीं उनके वालिद का हाथ उनके हाथ में पकड़ा दिया।
इधर अशरफ की इस मदद के लिए बरेली हज सेवा समिति की ओर से पम्मी खां के नेतृत्व में स्वागत किया गया। इसमें मोहसिन इरशाद, नवाब अय्यूब हसन खां, इकरार हुसैन, हाजी मोनिस इरशाद आदि शामिल रहे।