केंद्रीय कारागार में 24 मई 1918 को शहादत देने वाले शहीद प्रताप सिंह बारहठ का जेल के रिकार्ड में नामोनिशान ही मौजूद नहीं है। विधानसभा में शहीद के बारे में पूछे गए सवाल के बारे में सेंट्रल जेल के वरिष्ठ अधीक्षक ने यही जवाब लिखकर भेजा है। साहित्यकार सुधीर विद्यार्थी ने वरिष्ठ जेल अधीक्षक को तीन दिन पहले प्रताप सिंह बारहठ की शहादत का रिकार्ड उपलब्ध कराया था लेकिन वरिष्ठ अधीक्षक जेल अधीक्षक ने उसे मानने से इनकार कर दिया। जेल के मौलिक रिकार्ड में प्रताप सिंह बारहठ की शहादत का उल्लेख नहीं मिला तो उन्होंने यही जवाब लिखकर भेज दिया। विधानसभा में प्रताप सिंह बारहठ की शहादत का मामला शाहजहांपुर (शहर) के विधायक सुरेश कुमार खन्ना ने ये मामला उठाया था। राजस्थान के बड़े क्रांतिकारियों में से एक प्रताप सिंह बारहठ को बनारस षड्यंत्र केस में अंग्रेजों ने पकड़ा था। उनको बरेली की सेंट्रल जेल में रखा गया था। केंद्रीय कारागार में ही वह 24 मई 1918 को शहीद हो गए थे। साहित्यकार सुधीर विद्यार्थी शहीद प्रताप सिंह बारहठ की प्रतिमा लगाने के लिए नगर निगम से अनुमति मांगी। उस पर कार्रवाई नहीं हुई तो उनकी पहल पर शाहजहांपुर के विधायक सुरेश कुमार खन्ना ने प्रताप सिंह बारहठ की प्रतिमा लगाने की अनुमति न देने का मामला विधानसभा में उठाया। उस पर शासन ने सेंट्रल जेल के वरिष्ठ अधीक्षक से प्रताप सिंह बारहठ की शहादत के बारे में जानकारी मांगी थी। सुधीर विद्यार्थी का कहना है कि उन्होंने प्रताप सिंह बारहठ की शहादत के रिकार्ड वरिष्ठ जेल अधीक्षक टीएन पांडेय को उपलब्ध करा दिए थे । वह तीन घंटे सेंट्रल में रहकर पूरी बात भी समझा आए। फिर भी वरिष्ठ जेल अधीक्षक ने जवाब में लिखकर भेज दिया कि सेंट्रल जेल में प्रताप सिंह बारहठ की शहादत के कोई रिकार्ड उपलब्ध नहीं हैं। गलत सूचना भेजना शहीदों का अपमान है। वह इस पर चुप नहीं बैठेंगे। उधर, जेल अधीक्षक का कहना है कि वह साहित्यकार सुधीर विद्यार्थी के रिकार्ड को नहीं मान सकते। जेल में शहीद होने वालों का रिकार्ड स्टोर रूम में खोजा जा रहा है। अगर मिला तो वह उसे भी भेज देंगे।
‘ शासन को शहादत की सूचना जेल के मौलिक रिकार्ड के आधार पर ही भेजे जाने का प्रावधान है जो कि अब तक मिला नहीं है। आगे अगर जेल के मौलिक रिकार्ड में प्रताप सिंह बारहठ की शहादत की पुष्टि होती है तो उसे भेजा जाएगा।’ टीएन पांडेय, वरिष्ठ जेल अधीक्षक सेंट्रल जेल