अधिवक्ताओं ने जीएसटी आयुक्त को भेजा पत्र, मुश्किलें बताकर मांगा सहयोग
बरेली। अपर आयुक्त ग्रेड-2 (अपील) राज्य कर न्यायालय के अपीलीय अधिकारी जीएसटी की लंबित सुनवाई के लिए एक दिन में कई तारीखें लगा रहे हैं। तैयारी के अभाव में कई प्रकरण की सुनवाई में कठिनाई हो रही है। परेशान होकर अधिवक्ताओं ने जीएसटी आयुक्त को पत्र भेजा है।
जीएसटी बार एसोसिएशन के सचिव अमित अग्रवाल के मुताबिक एक ही दिन में कई अधिवक्ताओं को दस से बीस अपीलों की तारीख दी जा रही है। जो अव्यवहारिक है, क्योंकि एक साथ कई प्रकरण पर निस्तारण मुमकिन नहीं। न ही अपीलीय अधिकारी भी सभी अपीलों की सुनवाई कर पा रहे हैं। एक साथ कई प्रकरण पटल पर रखे जाने की वजह से आयुक्त कार्यालय से लंबित अपीलों को जल्द निस्तारित करने का दबाव है। कहा कि जीएसटी की लंबित अपीलें वर्ष 2017-18, 2018-19, 2019-20 संबंधित है। इन्हीं वर्षों में जीएसटी लागू हुई। जिसके चलते समस्याएं रहीं।
सचिव का आरोप है कि जीएसटीएन समस्या के चलते शुरुआती वर्षों में कई त्रुटियां हुईं। इसके समाधान के लिए अपील दाखिल की गई। वहीं, कई प्रकरण पटल पर होने से अभिलेख पर उपलब्ध साक्ष्य व सुनवाई के लिए दिए गए साक्ष्यों की जांच किए बिना ही आदेश पारित हो रहे हैं।
आदेश देने में मानकों का नहीं हो रहा पालन
अधिवक्ताओं के अनुसार क्रॉस एक्जामिनेसन का प्रार्थनापत्र का संज्ञान लिए बिना आदेश पारित हो रहे हैं। जो कि प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत के खिलाफ है। नॉन स्पीकिंग आदेश होने से अपीलीय अधिकारी पर अपील निस्तारण का दबाव है। सचिव अमित के अनुसार फाइनेंस एक्ट 2024 में वर्ष 2017-18, 2018-19, 2019-20 के धारा-73 के सभी आदेशों के लिए पेनाल्टी व ब्याज माफी हुई पर अब तक सर्कुलर नहीं आया। अमर उजाला ब्यूरो