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मनरेगा में काम कर रहीं फर्मों में कई में गड़बड़ी का अंदेशा, छंटनी शुरू

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पीलीभीत। मनरेगा में निजी फर्म बनाकर जिम्मेदारों द्वारा घोटाला करने के दो बड़े मामले सामने आने के बाद प्रशासन घोटालेबाजों पर शिकंजा कसने का मन बना चुका है। समस्त ब्लॉकों पर विकास कार्य में निर्माण सामग्री की सप्लाई करने वाली 2026 फर्मों की सूची जुटाई गई है। इसमें बड़े पैमाने पर फर्म गड़बड़ और नियम विरुद्घ तरीके से बनाए जाने का अफसरों को भी अंदेशा है। डीएम ने डीसी मनरेगा को तीन दिन के भीतर वैध और अवैध फर्मों को चिह्नित करने के निर्देश दिए हैं। इसके बाद अवैध फर्म को काली सूची में डाला जाएगा। संचालकों पर एफआईआर दर्ज कराने के साथ ही अब तक हुए लेनदेन का हिसाब जुटाकर रिकवरी भी कराई जाएगी। ऐसे में जल्द ही घोटालों को लेकर चर्चित मनरेगा में बड़े सुधार की उम्मीद है। फिलहाल इससेे जुड़े कुछ अधिकारियों की धड़कने बढ़ गई हैं।
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महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी (मनरेगा) के तहत जॉबकार्ड धारकों को काम न मिलने और मस्टररोल में गड़बड़ी करने के तमाम मामले आए दिन सामने आते थे। बीते दिनों एक शिकायत शासन स्तर पर हुई, जिसकी जांच में सामने आया कि अमरिया के रोजगार सेवक ने निजी फर्म और फर्जी मस्टररोल बनाकर करोड़ों का घोटाला किया। एपीओ और तीन रोजगार सेवकों को बर्खास्त करके कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कर 27 अगस्त को जेल भेज दिया गया। प्रशासन की जांच में फर्म को 3.62 करोड़ के लेनदेन का साक्ष्य भी मिला था।
इस मामले की पुलिस विवेचना करके चारों के खिलाफ चार्जशीट भी लगा चुकी है। शासन स्तर से विजिलेंस जांच चल रही है। इसके बाद डीएम पुलकित खरे ने अन्य कामों की जांच कराई तो एक और मामला पकड़ में आया। माधोटांडा के रोजगार सेवक और पूरनपुर के तकनीकी सहायक की भी फर्म ग्राम पंचायतों में लेनदेन कर रही थी। डीडीओ योगेंद्र कुमार पाठक ने जांच की। इसकी पत्रावली देखने के बाद डीएम ने इस मामले में भी एफआईआर के आदेश कर दिए हैं। हालांकि अभी रिपोर्ट दर्ज नहीं हो सकी है। इन दो बड़े मामलों के खुलने पर डीएम ने मनरेगा में लेनदेन कर रही 2026 फर्मों की जांच शुरू कराई है। शक है कि इसमें भी कई फर्में जिम्मेदार चला रहे हैं, जिन्हें नियम विरुद्घ तरीके से पंजीकृत कराया गया है। धरातल पर कोई फर्म है ही नहीं। सिर्फ कागजात में ही घोटाले करने के लिए इन्हें बनाया गया है।
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मनरेगा को घोटालों से मुक्त कराने के लिए अब ऐसी ही फर्मों पर शिकंजा कसा जाएगा। डीएम ने फीडबैक लेने के बाद इन फर्मों का सत्यापन करने की जिम्मेदारी डीसी मनरेगा मृणाल सिंह को सौंपी है। इसके लिए तीन दिन में रिपोर्ट भी मांगी गई है।
दूसरे चरण में खंगाली जाएगी लेनदेन की रकम
पहले चरण में फर्मों की छंटनी कराई जा रही है। गलत निकलने वाली फर्मों पर रिपोर्ट दर्ज कराई जाएगी। फिर दूसरे चरण में घोटाले की रकम वसूली पर कदम उठाए जाएंगे। यह पता लगाया जाएगा कि संबंधित फर्म को कितना भुगतान हुआ है। उसकी रिकवरी के लिए भी कार्रवाई होगी।
कई अफसर भी पड़ सकते हैं मुश्किल में
फर्म बनाकर घोटाला करने के दौरान ब्लॉक और मुख्यालय तक के कई अफसरों से साठगांठ की चर्चा है। लंबे समय से इसे लेकर सवाल खड़े होते रहे हैं। बीते दिनों दो मामले पकड़े गए तो भी यही बात सुर्खियों में रही थी। अब डीएम द्वारा फर्म की छंटनी कराकर कार्रवाई का मन बनाने पर भी खलबली मच गई है।
2026 फर्म सूचीबद्ध की गई हैं। इसमें कई फर्म के गड़बड़ होने का शक है। डीसी मनरेगा को तीन दिन के भीतर इसकी छंटनी करने के निर्देश दिए गए हैं। अवैध फर्म को काली सूची में डालकर रिपोर्ट दर्ज कराने के साथ ही रिकवरी भी कराएंगे। भ्रष्टाचार पर सख्ती होगी और पात्रों को लाभ मिल सकेगा। - पुलकित खरे, डीएम
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