पीलीभीत रोड पर महानगर से सेटेलाइट की ओर आने वाली सड़क की दूरी लगभग चार से पांच किमी. की है। इस बीच हर 30 से 40 मीटर दूरी पर सीवर लाइन के मैनहोल बीच सड़क पर बने हुए हैं, लेकिन ये सड़क के लेवल में नहीं हैं। वर्ष 2023 में इस सड़क पर सीवर लाइन बिछाने का कार्य किया गया था। इसके बाद सड़क तो बन गई, लेकिन मैनहोल के ढक्कन ऊंचे-नीचे हो गए। अब सड़क निर्माण में हुई लापरवाही का खामियाजा शहरवासियों को भुगतना पड़ रहा है।
यही हाल अन्य इलाकों का भी है। कहीं-कहीं तो मैनहोल के ढक्कन चार से छह इंच तक सड़क से ऊपर हैं और कहीं इतने ही इंच सड़क से नीचे हैं। बरसात के समय जलभराव में वाहन चालकों को ये नहीं दिखते, इसकी वजह से कई बार दो पहिया सवार गिरकर चोटिल हो जाते हैं। ये समस्या कई नई बन रहीं सड़कों पर भी है। वहां भी सड़क और सीवर के ढक्कन को लेवल में नहीं लाया जा रहा है।
जरा सी चूक होने पर हो रहे हादसे
राजेंद्रनगर के कारोबारी राकेश ने बताया कि सड़क पर सीवर लाइन बिछाने का कार्य डेढ़ वर्ष पूर्व किया गया था। अब तक सीवर के उठे हुए ढक्कनों को लेवल में नहीं लाया गया है। इस वजह से जरा सी चूक होते ही शाम के समय दो पहिया चालक चोटिल हो जाते हैं।
कई बार ई-रिक्शा पलटते बचा
प्रेमनगर निवासी राजकुमार ने बताया कि सीवर लाइन डालने के लिए खोदी गई सड़क पर अब तक चैंबर के ढक्कनों के लेवल में नहीं किया गया है। एक गड्ढ़ा तो ऐसा है कि जहां कई बार ई-रिक्शा पलटने से बचा है। दो पहिया चालक तो आए दिन गिरकर चोटिल हो रहे हैं।
सड़क दबने से ऐसा हो गया होगा। मेरे संज्ञान में ऐसा नहीं आया है। इसको मैं स्वयं मौके पर जाकर चेक करूंगा। अगर सीवर के ढक्कन से समस्या है तो इसको तुरंत ठीक कराने का कार्य किया जाएगा।
प्रमोद वर्मा, अपर अभियंता, जल निगम