25 को होगी, संतान की कामना पूरी करने वाले भीष्म पंचक व्रत भी इसी दिन से
बरेली। इस बार देवोत्थान एकादशी 25 नवंबर को मनाई जाएगी। संतान की कामना पूरी करने वाले भीष्म पंचक व्रत भी एकादशी से शुरू हो रहे हैं। मान्यता है कि अषाढ़ के शुक्ल पक्ष की एकादशी को शंखासुर नामक दैत्य का वध के बाद चार माह तक भगवान विष्णु शयन करते हैं और कार्तिक के शुक्ल पक्ष की एकादशी को जागते हैं। देवोत्थान एकादशी से मांगलिक कार्य भी शुरू हो जाते हैं।
पंडित राकेश पांडेय बताते हैं कि एकादशी को भगवान विष्णु की पूजा करनी चाहिए और सायंकाल तुलसी विवाह करना चाहिए। संक्षिप्त स्कंद पुराण के अनुसार कार्तिक शुक्ल पक्ष की एकादशी को भीष्म ने अर्जुन से जल के लिए याचना की तो अर्जुन ने अपने बाण से गंगाजल प्रस्तुत किया था। कार्तिकी एकादशी से लेकर पूर्णमासी तक के व्रत को भीष्म पंचक व्रत कहते हैं। संतान की कामना रखने वाले दंपती भीष्म पंचक व्रत रखें तो उसे भगवान विष्णु की कृपा से वर्षभर के भीतर ही संतान प्राप्ति होती है। पूर्णमासी आने पर पहले ब्राह्मणों को भोजन कराकर गौदान करें। इस व्रत में अन्न निषेध होता है।
अबूझ मुहूर्त, कोई भी कर सकता है विवाह, लॉकडाउन के बाद पहली बार गूंजेगा बैंड बाजा
पंडित राकेश पांडेय ने बताया कि इस अबूझ मुहूर्त में कोई भी विवाह कर सकता है। ऐसा माना गया है कि यह सभी के लिए शुभ तिथि है। देवोत्थान एकदाशी पर लॉकडाउन के बाद पहली बार बैंड बाजे की आवाज सुनाई देगी। वैवाहिक कार्यों के व्यवसाय से जुड़े व्यवसाय में रौनक लौट कर आएगी।