बारह अक्तूबर की मध्य रात्रि से गुरु ग्रह पश्चिम दिशा में अस्त हो रहे हैं, जो 26 दिन बाद उदय होंगे। तब तक के लिए सभी मांगलिक कार्य बंद हो जाएंगे। छह नवंबर को पूर्व दिशा में उदय होने के बाद ही शुभ कार्य शुरू होंगे।
गुरु को ज्ञान, शिक्षा, विवाह, धन, परोपकार आदि शुभ कार्यों का कारक माना जाता है। गुरु अस्त होने के दौरान वेदमंत्र भी प्रभावहीन हो जाते हैं। इसी के चलते शुभ और मांगलिक कार्यों पर रोक लग जाती है। ज्योतिषाचार्य आचार्य मुकेश मिश्र ने बताया कि पंचांगों में गुरु अस्त होने के दौरान विवाह और शुभ कार्यों के मुहूर्त नहीं दिए गए हैं। बता दें कि गुरु के अस्त होने से तीन दिन पहले वह वृद्ध और उदय के तीन दिन बाद तक बाल्यावस्था में रहते हैं। इसलिए तीन दिन पहले और तीन दिन बाद भी शुभ कार्य वर्जित रहते हैं। आचार्य बताते हैं कि 31 अक्तूबर को देवोत्थान एकादशी है। इस दिन अबूझ और स्वयं सिद्ध मुहूर्त होता है। देवोत्थान एकादशी को छोड़ दिया जाए तो गुरु उदय के बाद ही विवाह आदि जैसे मांगलिक कार्य शुरू होंगे।
गुरु अस्त का प्रभाव धर्म गुरुओं, शिक्षकों और धन से संपन्न व्यक्तियों पर पड़ता है। उन्हें सावधान रहने की जरूरत है। गुरु राशि वाले जातकों को गुरु पूजा करनी चाहिए।
ऐसे होते हैं ग्रह अस्त
जब कोई ग्रह सूर्य के समीप आ जाता है, तो सूर्य देव के तेज के आगे उसका बल क्षीण हो जाता है। ऐसे में वह ग्रह अस्त कहलाता है। इसे तारा डूबना भी कहते हैं।
इन उपायों से मिलेगी शांति
खासकर गुरु राशि वाले जातक गुरु मंत्र ‘ऊं ऐं क्लीं बृहस्पतये नम:’ का कम से कम एक-एक माला जपें। हल्दी की गांठ पीले कपड़े में लपेटकर गुरुवार को धारण करें। गुरुवार को केले के पौधे को पानी दें या गाय को मीठा खिलाते रहें। विष्णु भगवान की पूजा और सुंदरकांड का पाठ करना भी बेहतर फल देगा।