हस्ताक्षर फर्जी होने के बाद भी बैंक से धनराशि किस तरह आरटीजीएस होती रही, इसमें बैंक मैनेजर की भूमिका संदिग्ध बताई जा रही है। शनिवार को अर्शदीप ने ठगों से संपर्क करते हुए गंवाई धनराशि वापस मांगी तो उसे कोई जवाब नहीं मिला, इससे वह आहत हो गया। परिजनों के सामने मामला खुलने के डर से अर्शदीप ने जहर खा लिया।
अर्शदीप की हालत बिगड़ते देख परिजनों ने उसे जिला अस्पताल में भर्ती कराया, जहां पर शनिवार की देर शाम उसने दम तोड़ दिया। परिजन शव लेकर घर चले गए थे लेकिन ठगी का मामला सामने आने के बाद परिजनों ने पुलिस को सूचना दी। रविवार को परिजनों ने पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।