फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Lumpi Vaccine: जल्द बाजार में उपलब्ध होगी ‘लंपी प्रो इंड’, गोवंशों को लंपी रोग से बचाएगी यह वैक्सीन

Fri, 10 Mar 2023 03:19 AM IST
मुकेश कुमार अमर उजाला ब्यूरो, बरेली

सार

लंपी प्रो इंड वैक्सीन, भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आईवीआरआई) इज्जतनगर बरेली और राष्ट्रीय अश्व अनुसंधान केंद्र हिसार के वैज्ञानिकों के संयुक्त प्रयास से विकसित हुई है। वैज्ञानिकों के मुताबिक वैक्सीन का ट्रायल सफल रहा।
विज्ञापन
आईवीआरआई, बरेली - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

गाय और भैसों को जानलेवा लंपी त्वचा रोग से निजात दिलाने के लिए विकसित ‘लंपी प्रो इंड’ वैक्सीन जल्द बाजार में उपलब्ध होगी। नई दिल्ली स्थित भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) में इंडस्ट्री स्टेकहोल्डर कन्सल्टेशन समारोह के दौरान अहमदाबाद के मेसर्स हेस्टर बायोसाइंस कंपनी को वैक्सीन का हस्तांतरण किया गया। वैज्ञानिकों का दावा है कि यह वैक्सीन लंपी रोग के प्रभावी नियंत्रण में कारगर है।

विज्ञापन


लंपी प्रो इंड वैक्सीन, भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आईवीआरआई) इज्जतनगर बरेली और राष्ट्रीय अश्व अनुसंधान केंद्र हिसार के वैज्ञानिकों के संयुक्त प्रयास से विकसित हुई है। वैज्ञानिकों के मुताबिक वैक्सीन का ट्रायल सफल रहा। इसके प्रयोग से लंपी स्किन रोग का प्रभावी नियंत्रण संभव है। 

एक डोज के लिए खर्च करने होंगे दो रुपये 

पशुपालकों को वैक्सीन की एक डोज पर अधिकतम दो रुपये खर्च करना होगा। यह बीमारी पशुपालकों के आर्थिक नुकसान का प्रमुख कारण है। इस बीमारी से सभी आयु के गोवंश प्रभावित होते हैं। यह बीमारी प्रमुख रूप से मच्छरों और खून चूसने वाले कीटों, मक्खियों के जरिए जानवर में फैलती है।

Trending Videos

वैक्सीन हस्तांतरण के दौरान आईसीएआर के महानिदेशक डॉ. हिमांशु पाठक, उप महानिदेशक (पशु विज्ञान) डॉ. बीएन त्रिपाठी, आईवीआरई इज्जतनगर के निदेशक डॉ. त्रिवेणी दत्त, राष्ट्रीय अश्व अनुसंधान केंद्र हिसार के निदेशक डॉ. टीके भट्टाचार्य, सीईओ एग्रोनेट डॉ. प्रवीण मालिक हेस्टर बायोसाइंस के चीफ साइंटिफिक अधिकारी डॉ. मनोज कुमार, आईवीआरआई के संयुक्त निदेशक (शोध) डॉ. संजय कुमार सिंह मौजूद रहे।

झारखंड के पशु से लिया गया था विषाणु

लंपी प्रो वैक्सीन को विकसित करने के लिए विषाणु को अश्व अनुसंधान केंद्र स्थित प्रयोगशाला में वर्ष 2019 में अलग किया गया था। इसके लिए सैंपल को झारखंड के रांची में फैली एलएसडी महामारी के दौरान पशु से लिया गया था। इसके बाद विषाणु को वीरो कोशिकाओं में लगातार 50 बार प्रयोग किया। नतीजा, जो विषाणु मिला उसकी रोगजनक क्षमता खत्म हो चुकी थी। इसलिए इसे वैक्सीन बनाने में प्रयोग किया गया। यह होमोलागस एलएसडी वैक्सीन पशु को साल भर प्रतिरोधक क्षमता प्रदान करती है।
विज्ञापन

वैक्सीन की खुराक , टीकाकरण का तरीका

वैक्सीन की एक डोज में लाइव एटेन्यूटेड एलएसडी विषाणु की एक निश्चित मात्रा होती है। टीके की प्रत्येक शीशी में 50 डोज फ्रीज ड्राइड रूप में होती है। डाइलुएंट की 50 मिली की बोतलों में अलग आपूर्ति की जाती है। उपयोग से ठीक पहले फ्रीज ड्राइड को डाइलुएंट में एक निश्चित मात्रा में मिलाया जाता है। इसके बाद प्रति पशु एक मिली डोज त्वचा के नीचे दी जाती है। वैक्सीन को चार डिग्री सेल्सियस तापमान में रखना चाहिए। एक बार मिश्रण बनने के बाद कुछ घंटों में ही इसका प्रयोग करना होता है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें