कंपनियाें की मिलीभगत से उज्जवला एलपीजी योजना में दलाल हावी हो गए हैं। लगातार मिल रही शिकायतों को कंपनियों ने दरकिनार कर दिया है, इससे एजेंसियाें बेलगाम हो गयी हैं और मुफ्त में मिलने वाले कनेक्शन पर वसूली हो रही है।
केंद्र सरकार ने पिछले दिनों गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले परिवारों को मुफ्त में घरेलू रसोई गैस कनेक्शन देने की योजना शुरू करायी थी। लाभार्थी परिवार का चयन 2011 में हुए सामाजिक, आर्थिक और जाति सर्वे सूची से किया जाना है। बरेली जिला सूची में करीब दस लाख लोग हैं। इसी सूची से महिला नाम से कनेक्शन दिए जाने हैं, साथ ही वन फैमिली वन कनेक्शन नियम पालन भी किया जाना है। ज्यादातर एजेंसियों ने सूची में से नाम छंटाने के लिए एजेंट सक्रिय कर दिए। मीरगंज, आंवला और बहेड़ी आदि तहसीलों में फ्री गैस कनेक्शन दिए जाने के नाम पर एक हजार से 1500 रुपये तक वसूली होने लगी। जब मामला ज्यादा उछला तो कुछ दलालों पर कार्रवाई भी हुई। इसके बावजूद तमाम एजेंसियों पर दलाल हावी हैं। एजेंसियों ने एक ही परिवार में कई कनेक्शन दे दिए हैं जबकि सिर्फ एक ही कनेक्शन ही दिया जाना था।
700 रुपये में दे रहे किट
कुछ एजेंसियां फ्री कनेक्शन योजना में सात सौ रुपये की जबरन किट दे रही हैं। प्रेमनगर स्थित लक्ष्मी एचपी गैस एजेंसी ने इसकी बाकायदा रसीदें भी जारी की हैं। प्रभावित लोगों ने बताया कि स्टैंड, लाइटर, लाइट उन्हें दिया गया है। जबकि कंपनी सेल्स अफसर सौरभ यादव ने बताया कि ऐसा करना अवैध है। तीन चार माह पहले खुली एचपी एजेंसी के उत्कर्ष ने बताया कि करीब साढ़े तीन हजार उज्जवला योजना में कनेक्शन दिए जा चुके हैं, जबकि सामान्य श्रेणी में तीन लोगों ने कनेक्शन लिए हैं। बता दें, जिले भर में एचपी एजेंसियोें ने पांच सितंबर तक 6369 कनेक्शन दिए गए हैं तीनों कंपनियों ने 40,657 कनेक्शन जारी किए हैं।
उधर, शहरी एजेंसी से बड़ी तादाद में उज्जवला कनेक्शन दिए जाने पर डीएसओ केएल तिवारी ने हैरत जताते हुए कहा है कि मामले की जांच कराएंगे। उनका कहना है कि एजेंसी अपने कार्यक्षेत्र में ही कनेक्शन दे सकती है और मुफ्त कनेक्शन योजना में अतिरिक्त वसूली और उसके साथ ही अन्य सामान बेंचना पूरी तरह अवैध है।