लाउडस्पीकर लगाने की अनुमति के लिए आवेदन 15 जनवरी तक ही जमा किए जाएंगे। इसके बाद कोई भी आवेदन स्वीकार नहीं किया जाएगा। जिन लाउडस्पीकरों की अनुमति नहीं होगी, वे अवैध माने जाएंगे और उन्हें उतरवाने का काम 16 जनवरी से किया जाएगा।
प्रभारी जिलाधिकारी ओपी वर्मा ने बताया कि शासन से जारी आदेश में आवासीय इलाकों में 45 डेसिबल तक ही ध्वनि मान्य है। इतनी ध्वनि के लिए एक ही लाउडस्पीकर काफी है। अगर कोई कम ध्वनि के दो लाउडस्पीकर बजाकर निर्धारित मानक की ध्वनि का पालन करता है तो उसे दो लाउडस्पीकर लगाने की अनुमति भी दी जा सकती है, लेकिन आवाज का परीक्षण कराने के बाद ही। अगर एक लाउडस्पीकर की ध्वनि परीक्षण में निर्धारित 45 डेसिबल से अधिक मिलती है तो उसे भी बंद करा दिया जाएगा। रात 10 से सुबह छह बजे तक कोई लाउडस्पीकर नहीं बजेगा। न ही इसकी अनुमति किसी को दी जाएगी। अगर कोई इसका उल्लंघन करेगा तो उसके विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
प्रभारी डीएम के अनुसार धार्मिक स्थलों पर लाउडस्पीकरों के सत्यापन का काम 15 जनवरी तक होगा। धार्मिक स्थलों की देखरेख करने वाले संचालकों को सोमवार तक हर हाल में लाउडस्पीकर लगे होने की सूचना देकर अनुमति लेने के लिए आवेदन करने के निर्देश दिए गए हैं। 15 जनवरी तक आवेदन न करनेे वाले धर्मस्थलों या अन्य स्थानों पर लगे लाउडस्पीकरों को अवैध माना जाएगा। बिना अनुमति लगे लाउडस्पीकरों को 16 जनवरी से पुलिस की मदद से उतरवाने का काम शुरू होगा। 20 जनवरी को इस संबंध में शासन को रिपोर्ट भेजी जानी है।
पांच साल की जेल, एक लाख जुर्माना
बरेली। रात 10 से सुबह छह बजे के बीच लाउडस्पीकर बजाते पकड़े जाने पर एक लाख रुपये का जुर्माना या फिर पांच साल के कारावास की सजा का प्रावधान है। बिना अनुमति लाउडस्पीकर लगाने पर भी इतना ही जुर्माना और सजा होगी। रात 10 बजे के बाद शादी या निजी धार्मिक समारोह में भी लाउडस्पीकर बजता है तो संबंधित समारोह संचालक पर भी इन्हीं नियमों के तहत कार्रवाई होगी। औद्योगिक एरिया में रात में 70 डेसिबल, व्यावसायिक एरिया में 55 डेसिबल, आवासीय एरिया में 45 डेसिबल और शांत इलाकों में 40 डेसिबल तक की ध्वनि ही मान्य होगी। इससे अधिक ध्वनि होने पर नियमों का उल्लंघन मानते हुए कार्रवाई की जाएगी।