शहर की मस्जिदोें में लाउडस्पीकर बजाने की प्रशासन से परमीशन मिलने लगी है, मगर कड़ी शर्तों के साथ। इन शर्तों में समय की पाबंदी के अलावा आवाज की तीव्रता की सीमा भी शामिल है। शर्तों का उल्लंघन करने पर सजा और जुर्माने का भी प्रावधान है। अभी तक जिन मस्जिदों को अनुमति दी गई है उसमें एक ही लाउडस्पीकर बजाने को कहा गया है। इसे बजाने का समय भी सुबह छह बजे से रात 10 बजे तक रखा गया है। एडीएम (सिटी) की ओर जारी अनुमति में कहा गया कि लाउडस्पीकर से ऐसी कोई तकरीर नहीं की जाएगी जिससे दूसरे धर्म के लोगों की भावनाओं को ठेस पहुंचती हो और शांति व्यवस्था प्रभावित होती हो। दूसरे संप्रदाय के घरों और धार्मिक स्थानों पर भी लाउडस्पीकर का इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा। अगर कोई कार्यक्रम किसी और जगह किया जा रहा है तो उस जगह के मलिक से अनुमति लेनी होगी। ऐसा न करने पर लाउडस्पीकर बजाने की अनुमति स्वत: निरस्त समझी जाएगी। शर्तों का उल्लंघन करने पर पांच साल तक की कैद और एक लाख रुपये के जुर्माने तक की सजा होगी। जिस स्थान पर लाउडस्पीकर का इस्तेमाल किया जा रहा है वहां ध्वनि का स्तर मानक से ज्यादा न हो।
मस्जिदों की परमीशन में फंसा समय का पेंच
प्रशासन की ओर से मस्जिदों को लाउडस्पीकर बजाने की अनुमति में समय का पेच फंस गया है। परमीशन में लाउडस्पीकर बजाने का समय सुबह छह बजे से रात दस बजे तक है, लेकिन इसमें फज्र की नमाज को लेकर तस्वीर साफ नहीं है। अभी दिन छोटे होने की वजह से फज्र की नमाज सुबह छह बजे हो जाती है लेकिन जैसे जैसे दिन बड़े हाेंगे यह समय घटकर सुबह चार बजे तक आ जाएगा। ऐसे में अजान लाउडस्पीकर पर कैसे दी जा सकेगी। इसके अलावा रमजान के महीने के बारे में भी परमीशन में कुछ नहीं कहा गया है। माहे रमजान में सहरी के वक्त का मस्जिदों से एलान होता है। मकबरे वाली मस्जिद को मिली परमीशन में इस बात का कोई उल्लेख नहीं है। मकबरे वाली मस्जिद के मुतवल्ली शमीम अहमद खां कहते हैं कि इस बारे में जल्द ही और मस्जिदों के मुतवल्ली के साथ बैठक की जाएगी। इसमें तय किया जाएगा कि किस तरह प्रशासन से मिलकर लाउडस्पीकर बजाने के समय में तबदीली कराई जाए।