निर्जला एकादशी इस बार शुक्रवार को मनाई जाएगी। इसे भीमसेनी एकादशी भी कहा जाता है। निर्जला एकादशी का व्रत विशेष रूप से उन भक्तों के लिए महत्वपूर्ण है जो अन्य एकादशियों का उपवास नहीं रख पाते है। इस दिन का व्रत सभी एकादशियों के पुण्य के समान माना जाता है।
बरेली के पंडित राजेश कुमार शर्मा ने बताया कि इस बार एकादशी तिथि पांच जून को रात्रि 2:18 से प्रारंभ हो कर छह जून को रात्रि 4:49 तक रहेगी। उदया तिथि की प्रधानता के चलते छह जून को मनाई जाएगी। निर्जला एकादशी का व्रत विशेष रूप से पुण्यदायक माना जाता है। यह व्रत उन लोगों के लिए अत्यंत लाभकारी है जो अन्य एकादशियों में उपवास नहीं रख पाते। इस दिन उपवास करने से समस्त पापों का नाश होता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
यह व्रत भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त करने का उत्तम साधन है। इस दिन भगवान विष्णु की मूर्ति का स्नान कराकर उन्हें पीले वस्त्र पहनाएं, तुलसी के पत्ते, चंदन, धूप, दीप और फूल अर्पित करें। इस दिन जल, अन्न, वस्त्र, छाता आदि का दान करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है।