बरेली। भ्रष्टाचार के मामले में बिजली निगम के जेई सूरजपाल गुप्ता और संविदाकर्मी नरेंद्र सिंह रावत जेल चले गए। एसडीओ रामजगत वर्मा के निलंबन आदेश मुख्यालय से आना है। जेई और एसडीओ के बीच हुई बातचीत की रिकाॅर्डिंग को साक्ष्य मानते हुए पुलिस मामले की जांच कर रही है। इसी के आधार पर एसडीओ को सह अभियुक्त बनाया गया है।
सुभाषनगर के जेई सूरजलाल गुप्ता और संविदाकर्मी नरेंद्र सिंह रावत को पांच हजार रुपये घूस लेते वक्त 26 जनवरी को गिरफ्तार किया गया था। गिरफ्तारी से 37 मिनट पहले जेई और एसडीओ रामजगत वर्मा के बीच लेनदेन को लेकर हुई बातचीत की रिकॉर्डिंग जेई के फोन में मिली तो एसडीओ को भी सह अभियुक्त बनाया गया। भ्रष्टाचार के खेल में अधिकारी भी शामिल हैं, लेकिन सोमवार को किसी भी जिम्मेदार ने इसकी तह तक जाने का प्रयास नहीं किया। मुख्य अभियंता रणविजय सिंह ने बताया कि निलंबन की संस्तुति तो पहले ही की जा चुकी है। अब मुख्यालय से आदेश आने का इंतजार है। जहां तक भ्रष्टाचार का सवाल है, पुलिस विवेचना कर रही है। कानून अपना काम करेगा। जो जैसा करेगा, वैसा ही भरना पड़ेगा।
ये है मामला
सुभाषनगर थाना क्षेत्र के नवजीवन अपार्टमेंट निवासी परमीत कुमार, बदायूं रोड पर मकान बनवा रहे हैं। उन्होंने पड़ोसी से सहमति के आधार पर बिजली ली थी, लेकिन जेई और संविदाकर्मी ने वीडियो बनाकर उनके खिलाफ चोरी का मुकदमा दर्ज कराने की धमकी देकर 25 हजार रुपये मांगे थे। परमीत ने भ्रष्टाचार निवारण संगठन के डिप्टी एसपी को अवगत कराया। 26 जनवरी को जैसे ही उन्होंने जेई को पांच हजार रुपये दिए, टीम ने जेई और संविदाकर्मी को रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया था।