समर्थकों से मुलाकात करते वरुण गांधी
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वरुण गांधी के भाषण में आज न तो पहले जैसी आक्रामकता थी और न विरोधियों के लिए तल्खी। वर्ष 2009 के चुनाव में बनी अपनी प्रखर हिंदूवादी नेता की छवि के विपरीत वरुण बेहद सहज, सहनशील और परिपक्व नेता के रूप में नजर आए। उन्होंने पीलीभीत को अपनी कर्मभूमि बताकर यहां के लोगों से भावनात्मक रिश्ता जोड़ने की कोशिश की। कहा- आज मेरी जो भी हैसियत है वो यहां के लोगों की वजह से ही है।
शुक्रवार को नामांकन के बाद दोपहर 1.15 बजे यहां मां यशवंतरी देवी मंदिर परिसर में सभा को संबोधित करते हुए वरुण ने कहा कि यह सिर्फ उनका चुनाव नहीं है। हम सबका चुनाव है। यानी हिंदू, मुस्लिम, सिख, बौद्ध, सभी धर्मों और वर्गों के लोगों का चुनाव है। अपनी मां मेनका गांधी के वैधव्य का जिक्र करते हुए वरुण ने कहा कि जब पिता संजय गांधी का निधन हुआ तो मां की उम्र महज 23 वर्ष थी। जब वह समझदार हुए तो मां ने कहा- बेटा मैं सिर्फ तुम्हारे लिए जी रही हूं। बस एक ही अपेक्षा है कि कभी परिवार का नाम खराब मत होने देना।
वरुण बोले पीलीभीत की जनता ने उन्हें सांसद बनाया, लेकिन उन्होंने कभी वेतन नहीं लिया। अपने वेतन से गरीब किसानों और बेघरों की मदद की। कभी दबाव और दलाली की राजनीति नहीं की। अगर उनसे कभी यह पाप हो जाए तो पीलीभीत की जनता को हक है कि उनकी जमानत जब्त करा दे। उनके खून की एक-एक बूंद यहां की जनता की सेवा के लिए है। वह लेना नहीं, बल्कि देना बैंक हैं।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संघर्ष के बल पर यह साबित कर दिया है कि इस देश में एक गरीब का बेटा भी प्रधानमंत्री बन सकता है। पद तो आएंगे, जाएंगे लेकिन यह देश सदा रहेगा। इसका मान-सम्मान और स्वाभिमान बना रहना चाहिए। यह चुनाव सत्ता के लिए नहीं, बल्कि देश के मान, सम्मान और स्वाभिमान का चुनाव है।