पिता के राजनीतिक और सामाजिक कार्यों में हाथ बंटाने वाले अरविंद का यह पहला चुनाव है। हालांकि, वह पूर्व में छात्रसंघ अध्यक्ष रह चुके हैं। उनके सामने अपने पिता की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाने की चुनौती है।
वहीं, सपा प्रत्याशी अवधेश वर्मा अपना सियासी अस्तित्व बचाने के लिए पूरी ताकत से चुनाव लड़ रहे हैं। राजनीतिक रूप से अनुभवी अवधेश वर्मा दो बार विधायक और एक बार बसपा सरकार में राज्यमंत्री रह चुके हैं। बसपा से भाजपा होते हुए वह सपा में शामिल हुए हैं। अब उनके सामने यह चुनाव अपनी खोई राजनीतिक जमीन फिर से हासिल करने का अवसर है।
राजनीतिक दिग्गजों की प्रतिष्ठा भी फंसी दांव पर
जिले में दो कद्दावर कैबिनेट मंत्री सुरेश कुमार खन्ना और जितिन प्रसाद हैं। सहकारिता राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार जेपीएस राठौर भी मजबूत पकड़ रखते हैं। वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना भाजपा प्रत्याशी अरुण सागर के पक्ष में प्रचार के दौरान पूरा जोर लगाए रहे। ऐसे में मंत्रियों की प्रतिष्ठा भी शाहजहांपुर की सीट में फंसी हुई है। वहीं सपा प्रत्याशी ज्योत्सना गौंड के मामा और सपा पिछड़ा वर्ग प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष राजपाल कश्यप राजनीति के बड़े खिलाड़ी माने जाते हैं। अपनी भांजी के लिए राजपाल रणनीतिकार की भूमिका भी निभा रहे हैं।
कैडर वोट के सहारे चौंकाने की कोशिश में बसपा
लोकसभा सीट से बसपा ने पूर्व प्रधानाचार्य दोदराम वर्मा को प्रत्याशी बनाया है। उनका यह पहला चुनाव है। कैडर वोट के भरोसे बसपा अप्रत्याशियत परिणाम हासिल करने का दम भर रही है। वहीं ददरौल विस उपचुनाव में सर्वेश चंद्र मिश्रा धांधू प्रत्याशी हैं। वह 2022 में नगर विधानसभा सीट से मंत्री सुरेश कुमार खन्ना के सामने चुनाव लड़ चुके हैं। ब्राह्मण और कैडर वोट के सहारे सर्वेश मिश्रा चुनौती पेश कर रहे हैं।