बरेली। विद्युत वितरण खंड चतुर्थ के हरुनगला बिजली उपकेंद्र का भार कम होगा। इससे इलाके में लो वोल्टेज, ओवरलोडिंग व लोकल फॉल्ट से होने वाली परेशानी से छुटकारा मिलेगा। पवन विहार में नए उपकेंद्र की स्थापना को स्वीकृति मिल गई है। इसके लिए जमीन की तलाश शुरू हो गई है। लाइनों की शिफ्टिंग और नई लाइनों समेत उपकेंद्र स्थापना के लिए मध्यांचल विद्युत वितरण निगम ने एस्टीमेट मांगा है। यह उपकेंद्र रीवैंप योजना के तहत बनाया जाएगा।
हरुनगला बिजली उपकेंद्र से जुड़े क्षेत्रों में लोकल फाॅल्ट समेत अन्य कारणों से कटौती की सबसे ज्यादा समस्या रहती है। पवन विहार, कृष्णा कॉलोनी, पीलीभीत बाइपास ऐसे इलाके हैं, जहां फॉल्ट होने पर आपूर्ति सुचारू करने में काफी समय लगता है। पिछले दिनों मरम्मत कार्यों के बीच सबसे लंबे 11,000 केवी के पवन विहार फीडर को दो हिस्सों में बांटकर आपूर्ति सामान्य करने की कोशिश की थी, लेकिन इसके बाद भी पवन विहार, पीलीभीत बाइपास और हरुनगला में समस्या दूर नहीं हुई है। आठ माह पहले हरुनगला उपकेंद्र के क्षेत्र में एक और बिजली उपकेंद्र बनाने का प्रस्ताव भेजा गया था। इसे मंजूरी मिल गई है।
रीवैंप योजना के तहत 33 केवी के बिजली उपकेंद्र का निर्माण कराया जाना है। इसके लिए भूमि की तलाश की जा रही है। अधिशासी अभियंता गौरव शुक्ला ने बताया कि रीवैंप योजना के तहत पवन विहार में नए बिजली उपकेंद्र को स्वीकृति मिल गई है। एस्टीमेट बनाने समेत अन्य औपचारिकताओं को पूरा किया जा रहा है। इसी वर्ष बिजली उपकेंद्र की स्थापना का काम शुरू हो जाएगा।