बरेली। गाजियाबाद प्रकरण को लेकर चल रही बार एसोसिएशन की हड़ताल को एक माह होने को है। अब 28 नवंबर को होने वाली बार एसोसिएशन की आमसभा में तय किया जाएगा कि हड़ताल आगे भी जारी रखनी है या फिर वकील काम पर लौटेंगे। इस बीच दूर-दराज से आने वाले वादकारियों को भटकना पड़ रहा है। उन्हें सिर्फ तारीख पर तारीख मिल रही है। 56 न्यायालयों में रोजाना 400 से ज्यादा मामलों में सुनवाई प्रभावित हो रही है।
शनिवार को भी कोर्ट परिसर के बाहर वकीलों ने गाजियाबाद प्रकरण के विरोध में प्रदर्शन करते हुए जिला जज गाजियाबाद के निलंबन की मांग की। गाजियाबाद जिला न्यायालय में जिला जज और वकीलों के बीच तकरार के बाद 29 अक्तूबर को पुलिस ने वकीलों पर लाठीचार्ज कर दिया था। इसके बाद से ही वकील आंदोलित हैं। यहां न्यायालय परिसर में अलग-अलग 56 न्यायिक अधिकारियों की अदालतें हैं। बार पदाधिकारियों के अनुसार प्रत्येक अदालत में रोजाना औसतन आठ-दस मामले सुनवाई के लिए लगे हैं।
शासकीय अधिवक्ता कोर्ट पहुंच रहे हैं, लेकिन बचाव पक्ष की ओर के वकील नहीं आ रहे। ऐसे में इन मामलों में अगली तारीखें देने के अलावा कोई चारा नहीं है। संवाद
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यह बोले वादकारी
फरीदपुर थाना क्षेत्र के औरंगाबाद गांव से आया हूं। यहां आने के बाद पता लगा कि वकील हड़ताल पर हैं। ऐसे में कोर्ट ने अगली तारीख दे दी है। इससे पहले भी एक बार हड़ताल के कारण अगली तारीख मिल चुकी है।-धनीराम, वादकारी
बहेड़ी से आया था। पहले से ही पता था कि वकील हड़ताल पर हैं, लेकिन पहले से तारीख लगी थी। ऐसे में आना मजबूरी था। दिनभर भटकने के बाद शाम को अगले माह की तारीख मिल गई है। - प्रेमचंद्र, वादकारी
यह बोले अधिवक्ता-
गाजियाबाद में वकीलों के साथ बर्बरता की गई है। अगर आज हम उनके साथ खड़े नहीं होंगे तो आंदोलन कमजोर हो जाएगा। ऐसे मामले फिर से सामने आएंगे। हड़ताल का फैसला आमसभा ने लिया है। -वीपी ध्यानी, सचिव बार एसोसिएशन
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कोर्ट परिसर में 56 से अधिक न्यायालयों के साथ प्राधिकरण भी हैं। इनमें रोजाना 400 से ज्यादा मामले सुनवाई के लिए लगते हैं। वकील न्याय की मांग को लेकर हड़ताल पर हैं। वादकारियों के हितों का ध्यान रख रहे हैं। -हुलासी राम, वरिष्ठ अधिवक्ता