फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

शटडाउन लिया था.. फिर लाइन में कैसे दौड़ा करंट

विज्ञापन
विज्ञापन
बरेली। स्टेडियम रोड पर जिस हादसे में लाइनमैन मुन्ना की जान चली गई, उसके लिए बिजली विभाग की लापरवाही साफ तौर पर जिम्मेदार नजर आ रही है। बताया जा रहा है कि लाइन की मरम्मत शुरू करने से पहले शट डाउन लिया गया था लेकिन इसके बाद लाइन में करंट कैसे दौड़ा, यह जवाब कोई नहीं दे पा रहा है।
विज्ञापन

यह भी सवाल उठ रहा है कि डीडीपुरम सबस्टेशन के एसएसओ ने शटडाउन किसके निर्देश पर दिया। एक्सईएन विकास सिंघल से यह सवाल पूछा गया तो वह कन्नी काट गए। नियमों के मुताबिक हाईटेंशन लाइन का तार जेई की मौजूदगी में जोड़ा जाना चाहिए था लेकिन जेई के मौके पर मौजूद न होने के बावजूद आदर्श इंटरप्राइजेज ने किसके कहने पर काम शुरू करा दिया, एक सवाल यह भी है। जिस लाइन में फाल्ट हुआ उसके आसपास दूसरी हाईटेंशन लाइनों पर भी शटडाउन न लिया जाना बिजली विभाग की लापरवाही को बयां कर रहा है। अगर ठेकेदार फर्म शटडाउन ले लेती तो शायद हादसा न होता। इसी तरह जोगी नवादा इलाके में हुए हादसे में भी विभाग का स्टाफ सीधा दोषी नजर आ रहा है। लाइनमैन मुन्ना की मौत पर एक लाख रुपये की मदद देने के पीछे भी विभागीय अफसरों का लीपापोती का खेल बताया जा रहा है। कहा जा रहा है कि ऐसा इसलिए किया गया है ताकि ठेकेदार फर्म पर कोई बोझ न आए।

शहर में ही नहीं थे जेई
डीडीपुरम स्टाफ जब एचटी लाइन की मरम्मत कर रहा था तब जेई विजय कुमार शहर में ही नहीं थे। लोगोें ने जेई के नंबर पर संपर्क किया लेकिन उन्होंने फोन ही रिसीव नहीं किया। घटना के कई घंटों बाद जेई को इसकी जानकारी मिली तो वह मुख्यालय लौटे। सूत्रों के मुताबिक इसके बाद आननफानन में बैक डेट में उनसे यह कागजी खानापूरी कराई गई कि वह रविवार को जिला से बाहर होंगे, हालांकि उनके अधिकारी ने उनके इस प्रार्थनापत्र पर कोई सहमति नहीं जताई है।
विज्ञापन


ठेकेदारों और अफसरों के खेल से बढ़ा खतरा
बरेली। बिजली विभाग में तमाम खिलाड़ी हैं जो अफसरों और ठेकेदारों के साथ ऐसा दांव लगाते हैं, जिससे आनन-फानन में लाखों के वारे न्यारे हो जाते हैं। सड़कों पर फैली जानलेवा लाइनें, बगैर फेंसिंग के जहां-तहां रखे ट्रांसफार्मर यही कहानी कह रहे हैं। इन कामों को दुरुस्त करने पर करोड़ाें खर्च होता है लेकिन सिर्फ कागजों में। असलियत में इस रकम का बड़ा हिस्सा जेबों में पहुंच जाता है।
स्टेडियम रोड पर हुए हादसे के बाद अफसरों ने संवेदनहीनता दिखाने में भी कोई झिझक नहीं की। कोई अफसर प्रभावित परिवारों को ढांढ़स बंधाने नहीं पहुंचा। ठेकेदार के कर्मचारी के यहां एसडीओ धर्मेंद्र यादव चेक लेकर पहुंचे। हादसे के दौरान चीफ इंजीनियर के फोन नंबर 94159-01630 और एक्सईएन के 94159-01700 नंबर पर लोगों ने फोन किए लेकिन बताया जाता है कि कॉल रिसीव नहीं हुई। इसी वजह से भीड़ उग्र हो गई और नतीजा एसपी सिटी से धक्कामुक्की के रूप में सामने आया।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें