बरेली। युवक को घर बुलाकर विषैला पदार्थ देकर हत्या करने वाले अरमान उर्फ बाबू को अपर सत्र न्यायाधीश हरेंद्र बहादुर सिंह ने उम्रकैद की सजा सुनाई है। उधार लिए एक लाख रुपये वापस न करना पड़े इसलिए 2018 में युवक की हत्या की गई थी।
फरीदपुर के मोहल्ला मिर्धान निवासी इशरत जहां ने तहरीर देकर कहा कि मोहल्ले के अरमान उर्फ बाबू ने कारोबार के लिए एक लाख रुपये उधार लिए थे। सात अक्तूबर 2018 को रात दस बजे अरमान के बुलाने पर इशरत अपने बेटे तस्लीम व छोटे पुत्र तौसीफ के साथ अरमान के घर गई।
यहां युसूफ उसकी पत्नी व अरमान मौजूद थे। अरमान व उसके पिता युसूफ ने इशरत व तौसीफ को यह कहकर घर भेज दिया कि हिसाब करने में काफी समय लगेगा। काफी देर तक जब तस्लीम घर नहीं पहुंचा तो इशरत जहां अरमान के घर पहुंची। यहां बताया गया कि तस्लीम कुछ देर पहले ही रुपये लेकर घर से निकला है।
रात भर तस्लीम का कोई पता न चलने पर सुबह इशरत जहां ने बेटे व रिश्तेदारों के साथ अरमान के घर में अंदर घुसकर देखा तो दोमंजिले पर तख्त पर तस्लीम बेसुध पड़ा मिला। उसे अस्पताल ले जाया गया जहां डाक्टर ने मृत घोषित कर दिया। इशरत जहां की तहरीर पर अरमान उर्फ बाबू उसके पिता युसूफ व मां रेशमा के खिलाफ जहर देकर हत्या का मुकदमा दर्ज किया।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में बिसरा सुरक्षित रखा गया। बिसरा का परीक्षण कराने पर उसमें जहर की पुष्टि हुई। पुलिस ने आरोप पत्र अदालत में दाखिल किया। अदालत में 11 गवाह पेश किए गए। आरोपियों की तरफ से कहा गया कि मुकदमे में युसूफ व रेशमा की नामजदगी गलत है। वहीं एक लाख रुपये देने के कोई प्रमाण नहीं है। अपर जिला शासकीय अधिवक्ता रीतराम राजपूत ने कहा कि तस्लीम मृत अवस्था में आरोपियों के घर पाया गया। बिसरा रिपोर्ट में भी विषैला पदार्थ होने की बात पाई गई है। अदालत ने युसूफ व रेशमा के खिलाफ कोई साक्ष्य नहीं पाए। इस कारण दोनों को दोषमुक्त कर दिया। जबकि अरमान उर्फ बाबू को दोषी मानते हुए उसे उम्रकैद की सजा सुनाई।