विदेशी स्कॉलरों ने किया संपर्क
मौलाना ने बताया कि इस लाइब्रेरी के बनने देश-विदेश के उलमा और बुद्धिजीवियों में खुशी है। सऊदी अरब, मिस्त्र, पाकिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल, अमेरिका और साउथ अफ्रीका आदि विभिन्न देशों के रिसर्च स्कॉलर सीधे तौर पर संपर्क में हैं। भारत के राज्यों में स्थापित विभिन्न विश्वविद्यालयों में हो रहे आला हजरत पर पीएचडी का काम करने वाले 12 से ज्यादा स्कॉलर इस्लामिक रिसर्च सेंटर की लाइब्रेरी में आ चुके हैं।
उन्होंने बताया कि लाइब्रेरी की चर्चा केरला और तमिलनाडु के उलेमा तक जब पहुंचीं तो उन्होंने दरगाह आला हजरत पर हाजरी देने के बाद लाइब्रेरी देखकर अपनी खुशी का इजहार किया और कहा कि ये वक्त की जरूरत थी। मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने ये भी बताया कि अब तक 30 से ज्यादा पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। उसी की कड़ी में एक पुस्तक जिसका नाम 'मुफ्ती ए आजम हिन्द और उनके खुलफा' है, गत दिनों इस पुस्तक का विमोचन करने के लिए केरला के राज्यपाल आरीफ मोहम्मद खां आ चुके हैं। राज्यपाल ने पुस्तक की सराहना की थी।