इन दिनों शहर में एलईडी लाइट बदलने का काम चल रहा है, मगर सिफारिशों ने काम की रफ्तार रोक दी है। लिहाजा महीने भर में सिर्फ तीन हजार लाइट ही बदली जा सकी हैं, जबकि बीस हजार से ज्यादा लाइट बदला जानी थीं।
प्रदेश सरकार से निर्धारित एजेंसी एनर्जी एफिशिएंसी सर्विसेज लिमिटेड (ईईएसएल) को पूरे प्रदेश के निकायों में एलईडी लाइट लगाने की जिम्मेदारी दी गई है। नगर निगम क्षेत्र में इस कंपनी की टीम ने 26 जनवरी को पुरानी स्ट्रीट लाइट को हटाकर एलईडी लाइट लगाने का काम शुरू किया था। 250 वाट की सोडियम लाइट की जगह 70 एवं 110 वाट और 70 वाट की सोडियम लाइट के स्थान पर 35 वाट की एलईडी लाइट लगाने का काम शुरू हुआ। इसके अलावा पतली गलियों में 18 वाट की लाइट लगाने के निर्देश हैं। मगर पार्षदों ने इसका विरोध शुरू कर दिया। उनका कहना है कि 18 वाट की लाइट से कम रोशनी होगी, इसलिए गलियों में भी 35 वाट की एलईडी लगवाई जाएं। इस पर कंपनी के लोगों ने सभी जगह 35 वाट की एलईडी लगानी शुरू कर दीं। इसके चलते यह एलईडी जल्दी खत्म हो गईं और काम बाधित हो गया। कंपनी का काम देख रहे रॉबिन ने बताया कि दो-तीन दिन में 35 वाट की और एलईडी आ जाएंगी फिर काम तेज हो जाएगा। वहीं काम करने वाले कर्मचारियों का कहना है कि सिफारिशों के चलते भी काम तेजी नहीं पकड़ पा रहा है क्योंकि हर पार्षद अपने वार्ड में काम जल्दी कराना चाहता है। इसके चलते एक जगह का काम पूरा नहीं हो पाता और उसे छोड़कर दूसरी जगह शुरू हो जाता है। महीना भर बीत चुका है और अब तक सिर्फ तीन हजार लाइट ही बदली जा सकी हैं जबकि बीस हजार से ज्यादा लाइट बदली जानी हैं।