बरेली। कृष्णकांत यादव को कुश्ती विरासत में मिली। घर में पिता और दादा से सीखे दांव के सहारे अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में पदक जीते। सेना में भर्ती हुए। अब वह कोच बनकर खिलाड़ियों को कुश्ती के दांव-पेच सिखा रहे हैं और भारत को वैश्विक मंच पर पदक दिला रहे हैं। आठ से 13 जुलाई तक किर्गिजस्तान में आयोजित हुई अंडर-20 एशियन कुश्ती चैंपियनशिप में भारतीय टीम के कोच के रूप में उन्होंने एक स्वर्ण, दो रजत और दो कांस्य पदक दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वर्तमान में वह जाट रेजिमेंट सेंटर की बॉयज स्पोर्ट्स कंपनी में खिलाड़ियों को प्रशिक्षण दे रहे हैं। वह भारतीय खेल प्राधिकरण और मेजर ध्यानचंद स्टेडियम से भी जुड़े हैं।
कृष्णकांत यादव का कुश्ती का सफर वर्ष 2002 में शुरू हुआ, जब वह जाट रेजिमेंट सेंटर में बॉयज स्पोर्ट्स कंपनी के माध्यम से स्पोर्ट्स कैडेट के रूप में भर्ती हुए। वर्ष 2002 से 2005 तक प्रशिक्षण लेने के बाद वह 2008 में सेना में सिपाही के पद पर भर्ती हुए। इस दौरान जिला और प्रदेश स्तरीय प्रतियोगिताओं में उन्होंने कई पदक जीते। वर्ष 2010 में उन्हें हवलदार पद पर पदोन्नति मिली। इस बीच उन्होंने आठ वर्षों तक सीनियर नेशनल्स में भारत का प्रतिनिधित्व किया। वर्ष 2013 में एशियन चैंपियनशिप में कांस्य पदक, साल 2016 में दोहा (कतर) में सीनियर एशियन चैंपियनशिप में कांस्य पदक, 2017 में कॉमनवेल्थ चैंपियनशिप में रजत और 2018 के एशिया कप में स्वर्ण पदक भारत की झोली में डाला। संवाद
मेहनत, अनशुासन और समर्पण से मिलती है कामयाबी
इसके बाद वर्ष 2019 से 2020 तक उन्होंने एनआईएस पटियाला से डिप्लोमा कर कोचिंग का प्रशिक्षण लिया। फिर वर्ष 2024 में यूनाइटेड वर्ल्ड रेसलिंग लेवल-1 कोर्स पूरा किया और राष्ट्रीय स्तर पर कोच नियुक्त हुए। कृष्णकांत मानते हैं कि सफलता का रास्ता केवल मेहनत, अनुशासन और समर्पण से होकर गुजरता है। अब उनका लक्ष्य है कि आने वाली पीढ़ी को ऐसा प्रशिक्षण दें, जिससे वे ओलंपिक में तिरंगा लहराएं।