अब तक अफसरों पर नेताओं की हनक हावी थी। अपने आकाओं को नाराज नहीं करना चाहते थे लेकिन जैसे ही चुनाव आयोग के हाथ में डंडा गया सब राइट टाइम हो गए। बुधवार को चुनाव की घोषणा होते ही सिटी मजिस्ट्रेट और नगर आयुक्त की निगरानी में शहर भर से राजनीतिक दलाें के होर्डिंग, बैनर और झंडे उखाड़े का काम शुरू हुआ। पहले दिन कलेक्ट्रेट से शुरुआत हुई। सबसे पहले मुख्यमंत्री की कल्याणकारी योजनाआें वाले होर्डिंग फाड़े गए। इसके बाद चौकी चौराहा, गांधी उद्यान, सर्कि ट हाउस, अयूब खां चौराहा, चौपला चौराहा पर निगम टीम गई। सीबीगंज में भी अभियान चला।
24 तारीख का कर दिया था आदेश
डीएम ने होर्डिंग व बैनर हटाने के निर्देश दिए थे। 24 दिसंबर को नगर आयुक्त ने टीम गठित करके इसे प्रभावी करने को कहा था, लेकिन इनका आदेश भी दबा लिया गया। अधिशासी अभियंता गयूर अहमद और पर्यावरण अभियंता उत्तम कुमार वर्मा को जिम्मेदारी सौंपी गई थी। इनके अंडर में तीन टीम बनाई गई थी। सात थानाें का सहयोग मांगा गया था। कहा गया है कि अभियान के बाद सूचना जिला प्रशासन को भेजी जाए।
टीम गठित की गई थी ताकि अधिसूचना जारी होने पर होर्डिंग हटा ली जाएं। शहर में तमाम होर्डिंग लगी हुई हैं, जिन्हें एक साथ उतार पाना मुश्किल है। आदेश भी यही था कि अधिसूचना जारी होने पर कोई होर्डिंग बैनर शहर में न दिखे। सभी उतार ली जाएंगी।
शीलधर सिंह यादव, नगर आयुक्त
24 घंटे में नहीं हटे तो एफआईआर, वसूली भी होगी
बरेली। विधानसभा चुनाव की घोषणा होते ही प्रशासन भी हरकत में आ गया है। डीएम ने राजनीतिक दलों को अल्टीमेटम दिया है कि 24 घंटे के अंदर झंडे, पोस्टर, बैनर, वाल पेंटिंग नहीं हटीं तो उनके खिलाफ लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 के तहत रिपोर्ट दर्ज करा दी जाएगी। इनको हटाने पर हुए खर्च को वसूलने के लिए आरसी जारी होगी। यह रकम प्रत्याशी के खर्चे में शामिल भी की जाएगी।
डीएम ने कहा है कि तत्काल प्रभाव से आचार संहिता लागू कर दी गई है। ऐसे में सरकारी भवनों की दीवारों पर लिखे विज्ञापनों, पोस्टर कट आउट्स, होर्डिंग्स, बैनर, झंडे आदि हटा दिए गए हैं। जिन स्थानों पर अभी भी लगे हुए हैं उनको हटाने के लिए जनपद स्तर पर उड़न दस्ता, वीडियो निगरानी टीम, वीडियो अवलोकन टीम निरंतर लगी रहेगी। इसके लिए नियंत्रण कक्ष और काल सेंटर भी बना दिया गया है।
दूसरी ओर आचार संहिता लागू होने से पहले शुरू हो चुके और अधर में लटके कामों का ब्योरा जिला अर्थ एवं संख्याधिकारी को उपलब्ध कराने के निर्देश सभी विभागों और उनके अधिकारियों को दिए हैं। डीएम ने कहा कि बिना अनुमति के कोई अधिकारी मुख्यालय नहीं छोड़ेगा। जो भी नये अधिकारी या कर्मचारी जिले में पदभार ग्रहण करें हैं वह अपना डाटा निर्वाचन के लिए एनआईसी में दर्ज करा दें।
देहात के बाजार और सड़कें भी हो गई साफ
बुधवार दोपहर बाद गांव और कस्बों में पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों की अचानक चहलकदमी से ग्रामीण अचरज में थे । आचार संहिता लागू के बाद टीमें नेताओं के बैनर और होर्डिंग्स हटाने पहुंच गईं। किसी तरह का कोई विरोध नहीं हुआ।
मीरगंज में तहसील रोड, सिरौली चौराहा, थाना-स्टेशन रोड और हाईवे पर घंटों जोरशोर से पोस्टर, होर्डिंग, झालरें हटाने का अभियान चला। नगर पंचायत कर्मी सीढ़ी के सहारे खंभों पर चढ़ते और होर्डिंग्स उतारकर संग चल रही ट्रैक्टर ट्राली में भरते रहे। शाही में कानूनगो अरविंद शर्मा ने लेखपाल अतुल अग्रवाल के संग बरेली बस अड्डा, रम्पुरा चौराहा, साप्ताहिक बाजार स्थल, मिर्जापुर रोड आदि स्थलों से चुनावी होर्डिंग्स, हटवाए। हाफिजगंज में पुलिस ने होर्डिंग और बैनरों को उतारकर एक ट्रॉली में भरवाकर थाने भिजवाया। आंवला में एसडीएम प्रमिल कुमार सिंह के निर्देश पर सीओ संतोष कुमार सिंह और पुलिस बल ने नगर पालिका की टीम के साथ पुरैना तिराहे, रामनगर व बजीरगंज रोड पर अभियान चलाया। फरीदपुर में एसडीएम पारसनाथ मौर्या ने भुता, फरीदपुर देहात, बिथरी चैनपुर और फतेहगंज पूर्वी में प्रचार सामग्री हटवाने को टीमें भेजी। राजपुर कलां में अलीगंज एसओ सीपी त्रिवेदी ने पुलिस दल के साथ अलीगंज से सिरौली मार्ग पर लगे प्रत्याशियों के प्रचार होर्डिंग हटवाए। बिशारतगंज में हल्का लेखपाल विशाल मोहन मिश्रा, एसआई मनोज कुमार बिरला, सिपाही बादाम सिंह ने बैनर हटाए। भुता और क्षेत्र के पड़ोली, रसूला चौराहा, केसरपुर आदि सड़कों, सरकारी भवनों पर लगे पोस्टर हटवाए। नवाबगंज, फतेहगंज पूर्वी, शेरगढ़, शीशढ़, बरसेर, भोजीपुरा में भी अभियान चला।