मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कड़े रुख पर तहसील में भूमाफिया को चिन्हित किए जाने के नाम पर किए जा रहे खेल को अमर उजाला के मुहिम चलाए जाने के बाद डीएम ने भी समझ लिया। बुधवार को उन्होंने अधिकारियों की बैठक में निर्देश दिया कि शहरी इलाकों में बीडीए से बिना लेआउट पास कराए प्लाटिंग करने वालों की सूची बनाई जाए। डीएम ने साफ कहा कि इनमें से सरकारी जमीनों के साथ दबंगई के दम पर कमजोर लोगों की जमीनों पर कब्जा करने वालों को भूमाफिया घोषित किया जाएगा। उन्होंने यह भी साफ किया कि छोटे कब्जेदारों की अलग सूची तो बनेगी, लेकिन उन्हें भूमाफिया की श्रेणी में नहीं रखा जाएगा।
डीएम राघवेंद्र विक्रम सिंह ने कलक्ट्रेट सभागार में जिले के सभी एसडीएम, तहसीलदार और निकायों के अधिशासी अधिकारियों की बैठक में कहा कि यह पूरी तरह स्पष्ट है कि असली भूमाफिया को चिन्हित ही नहीं किया गया है। छोटे-मोटे कब्जेदारों को ही भूमाफिया बना दिया गया। इनमें कुछ ऐसे लोगों को भी भूमाफिया घोषित कर दिया गया है जिनसे कब्जाई गई जमीनें छुड़ाई जा चुकी हैं। डीएम ने कहा कि चकरोड की मामूली जमीन पर कब्जा करने वाले लोग अब भूमाफिया नहीं बल्कि कब्जेदारों को सूची में रहेंगे। छोटे कब्जेदारों को भूमाफिया की टॉप 10 सूूची से बाहर किया जाएगा। डीएम ने बैठक में निर्देश दिया कि सभी एसडीएम ज्वाइंट प्लानिंग करके असली भूमाफिया चिन्हित करने के साथ कार्रवाई भी कराएं।
अवैध खनन रोकने को निगरानी कमेटी बनी
बरेली। डीएम के आदेश पर एडीएम वित्त एवं राजस्व जगतपाल सिंह ने अवैध खनन रोकने को निगरानी कमेटी बना दी हैं। तहसील स्तर पर एसडीएम के अलावा तहसीलदार को निगरानी कमेटी में रखा गया है। ग्राम पंचायत स्तर की निगरानी कमेटी में प्रधान के अलावा वीडीओ, लेखपाल और चौकीदार का नाम भी शामिल रहेंगे। तहसील स्तर पर एसडीएम, तहसीलदार के अलावा संबंधित थाने के एसओ भी कमेटी का जिम्मेदार व्यक्ति बनाया गया है। उधर, मंगलवार को डीएम द्वारा बनाई गई कमेटी में खनन की 70 फाइलें और आठ रेता पट्टे के स्थानों को पट्टे पर देने पर विचार हुआ, लेकिन अभी तक फाइनल कोई फाइल नहीं हो पाई है।