बरेली। नवाबगंज जमीन घोटाले में फंसे अभिलेखागार के दो बाबुओं पर कार्रवाई फिलहाल टल गई है। डीएम ने एसीएम फर्स्ट की जांच में दोनों कर्मचारियों की गंभीर लापरवाही होने से इंकार किया है। उनका कहना है कि दोनों कर्मचारियों पर एफआईआर दर्ज है। पुलिस की जांच रिपोर्ट आने के बाद ही कोई नतीजा निकलेगा। फिलहाल दोनों बाबू पटल पर बने रहेंगे।
पूर्व एडीएम सिटी ओपी वर्मा ने नवाबगंज जमीन घोटाले की जांच कराई थी। इसमें खुलासा हुआ था कि नवाबगंज के गांव अटंगा चांदपुर के अबरार हुसैन की डंडिया नजमुल निशा स्थित सौ बीघा जमीन को खतौनी में जालसाजी कर तारिक नाम के शख्स की मिल्कियत दिखा दी गई थी। इसमें वर्ष 2014 में उप संचालक चकबंदी रहे रमाकांत शुक्ला के आदेश को भी व्हाइटनर लगाकर खतौनियों को खुर्द बुर्द किया गया था। जांच में चकबंदी और नवाबगंज तहसील के कर्मचारियों के साथ ही कलक्ट्रेट अभिलेखागार के दो कर्मचारी परगना अरेंजर राम मनोहर सक्सेना और नकल नवीस रकीमुल हसनैन को दोषी पाया गया था। कमिश्नर रणवीर प्रसाद के संज्ञान लेने के बाद डीएम वीरेंद्र कुमार सिंह ने इस मामले में छह कर्मचारियों पर रिपोर्ट कराकर विभागीय जांच के आदेश दे दिए थे। पिछले माह एसीएम फर्स्ट रहे मदन कुमार ने दोनों कर्मचारियों की जांच रिपोर्ट डीएम को सौंपी थी। इसके आधार पर डीएम ने अभिलेखागार के दोनों कर्मचारियों को दोषी नहीं माना है। उनका कहना है कि खतौनी में नई इंट्री करने से पहले डीडीसी कोर्ट के व्हाइटनर लगे आदेश की कॉपी को सही से देखना चाहिए था। कर्मचारियों की सिर्फ यही गड़बड़ी पकड़ी गई है। फिलहाल अब पुलिस जांच रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।
जांच रिपोर्ट में कर्मचारियों की गंभीर लापरवाही नहीं दिख रही। इसलिए राजस्व अभिलेखागार के दोनों कर्मचारियों पर अभी कोई एक्शन नहीं लिया जा रहा है। विभागीय कार्रवाई पुलिस जांच के बाद होगी। -वीरेंद्र कुमार सिंह, जिलाधिकारी