बरेली। लालफाटक पर ट्रैफिक बंद करने के लिए रेल अफसरों की एक माह की मोहलत भी खत्म होने शुरू हो गई है। इसके बाद रेलवे लालफाटक पर करीब डेढ़ साल तक ट्रैफिक को बंद रखेगा, जबकि वैकल्पिक रास्तों को लेकर प्रशासन खुद ही संतुष्ट नहीं है। स्थानीय स्तर पर भी इसका कोई हल नहीं निकल रहा है। कमिश्नर इस मामलों को लेकर सांसद धर्मेंद्र कश्यप से वार्ता करने के बाद सुझाव भी दे चुके हैं। कमिश्नर का कहना है कि यह समस्या का हल रेलवे बोर्ड स्तर पर ही संभव है। इसके लिए वह डीएम को भी निर्देशित करेंगे कि वह भी रेलवे बोर्ड तक यह मामला पहुंचाने के लिए चिट्ठी भेजकर पैरवी शुरू कराएं।
रेल अफसर लालफाटक पर ओवरब्रिज बनाने के लिए एक सितंबर से ट्रैफिक को बंद करने की डिमांड कर चुका है, लेकिन प्रशासन के तैयार न होने और डीएम के डीआरएम मुरादाबाद को चिट्ठी भेजने के बाद रेल अधिकारी यातायात का संचालन बंद न करने के लिए एक माह की समय सीमा दे चुके हैं, जबकि बदायूं आने जाने के लिए ट्रैफिक डायवर्जन के लिए चनेहटी और फरीदपुर-बुखारा रोड को चिह्नित किया गया है। जिला प्रशासन इन दोनों ही रूट को लेकर संतुष्ट नहीं है। अफसर संशय में है कि इन मार्गों पर यातायात शुरू करना कितना कारगर साबित होगा? कुछ दिन पहले कमिश्नर रणवीर प्रसाद ने भी इस समस्या की जटिलता को देखते हुए आंवला सांसद धर्मेंद्र कश्यप से बातचीत करने के साथ आग्रह किया था कि वह अपने स्तर से रेल मंत्रालय से संपर्क करें, क्योंकि स्थानीय रेल अधिकारियों से इसका कोई समाधान नहीं निकलना है। कमिश्नर का कहना है कि इस समस्या का हल तलाशने के लिए रेलवे बोर्ड ही कुछ कर सकता है। बोर्ड चाहे तो क्रासिंग के पास रोड चौड़ीकरण या फिर अंडरपास बनाने की अनुमति भी दे सकता है। कमिश्नर का कहना है कि डीएम से भी कहा जा रहा है कि वह सीधे रेलवे बोर्ड से भी पत्राचार करते हुए अपने स्तर से भी पैरवी शुरू करें।
लालफाटक पर ट्रैफिक बंद करने से काफी समस्या खड़ी हो जाएगी। इसमें रेलवे बोर्ड ही कोई तकरीब निकाल सकता है। इसके लिए डीएम से बोर्ड को दिक्कत से अवगत कराकर उसका समाधान कराने के लिए निर्देशित किया जाएगा।
-रणवीर प्रसाद, कमिश्नर