बरेली। लालफाटक ओवरब्रिज के लिए कैंट की जमीन के लिए एनओसी की फाइल को शासन से रक्षा मंत्रालय तक पहुंचने में करीब छह महीने लग गए। रक्षा मंत्रालय से मंजूरी के बाद जमीन अधिग्रहण मामले का हल निकलने की उम्मीद जाग गई है। कैंट में जमीन न मिल पाने से सेतु निगम इस ओवरब्रिज का काम आगे नहीं बढ़ा पा रहा है। इस ओवरब्रिज को बनाने के लिए सेतु निगम कैंट एरिया में करीब 6500 वर्गमीटर जमीन का अधिग्रहण करने के लिए काफी समय से मशक्कत कर रहा है। सेतु निगम और पीडब्ल्यूडी के इस प्रस्ताव को डीएम वीरेंद्र कुमार सिंह ने जनवरी में शासन में भेजा था। वहां से यह प्रस्ताव रक्षा मंत्रालय भेजा जाना था। यह फाइल लंबे समय से शासन में ही पड़ी रही। इस बीच कई बार रिमांडर भी भेजे गए, लेकिन इस पर कोई कार्यवाही नहीं हुई। इस ओवरब्रिज का काम बदायूं की ओर से कैंट की सीमा तक निर्माणाधीन है। 70 फीसदी तक पिलर और छत बनाने का काम भी हो चुका है, लेकिन कैंट की जमीन के मामले का निस्तारण अब तक नहीं हो सका है। सेतु निगम के अधिकारियों का कहना है कि कैंट की जमीन के अधिग्रहण की फाइल 30 जुलाई को शासन से रक्षा मंत्रालय के पास पहुंच गई है। यहां से अंतिम मंजूरी मिलने के बाद इस मामले का निस्तारण होने की संभावना है। गौरतलब है कि हाल में रेलवे के अधिकारियों ने भी क्रासिंग पर अपने हिस्से में आने वाले ओवरब्रिज का काम शुरू करा दिया है। ‘लालफाटक ओवरब्रिज के लिए कैंट की फाइल के तीस जुलाई को रक्षा मंत्रालय में पहुंचने की जानकारी है। यहां से स्वीकृति मिलने का इंतजार है, ताकि कैंट एरिया में बचे ओवरब्रिज के काम को आगे बढ़ाया जा सके।’ - देवेंद्र सिंह, सीपीएम, सेतु निगम