बरेली। धोखाधड़ी करने व गर्भ में बच्चे की जान लेने के आरोप से कोर्ट ने महिला डॉक्टर को बरी कर दिया। यह आदेश अपर सत्र न्यायाधीश अरविंद कुमार यादव ने किया। वादी बबलू कुमार ने मामले की रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि उनकी पत्नी किरन कुमारी का इलाज गर्भावस्था के दौरान सुभाषनगर करगैना पुलिस चौकी के पास मैटरनिटी नर्सिंग होम चलाने वाली डॉ. राधा शर्मा से चल रहा था। गर्भावस्था का समय पूरा होने पर सात जनवरी 2015 को वादी ने अपनी पत्नी को यहां भर्ती कराया। डाॅक्टर ने कहा कि आपरेशन होगा। 15 हजार रुपये नकद जमा कराए।
डाॅ. राधा शर्मा व उसके एक सहायक ने रात एक बजे किरन का आपरेशन न करके जबरन नार्मल डिलीवरी करा दी। इससे वादी की पत्नी का बहुत ज्यादा खून बह गया। बच्चे को अंदरूनी चोट पहुंची जिससे उसकी मौत हो गई। डाॅक्टर राधा शर्मा यह कहकर गुमराह करती रहीं कि जच्चा व बच्चा पूरी तरह से ठीक हैं। इन लोगों ने इलाज के दौरान लापरवाही बरती जिससे बच्चे की जान चली गई। वादी ने को पता चला कि डॉ. राधा शर्मा के पास कोई डिग्री नहीं है। न ही उसके सहायक के पास। अस्पताल में आपरेशन के समुचित उपकरण भी नहीं हैं। गलत इलाज की वजह से उसके बेटे की जान चली गई। विवेचना के बाद डाॅक्टर के खिलाफ इंडियन मेडिकल काउंसिल एक्ट की धाराओं में आरोप पत्र पेश किया गया। अभियोजन की ओर से कोर्ट में सात गवाह भी पेश किए गए। अभियोजन अदालत में अपना मामला साबित करने में असफल रहा। कोर्ट ने अभियुक्ता राधा शर्मा को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया।