फरीदपुर। नगर पालिका परिषद के चेयरमैन शराफत जारी वाले के मकान के लिंटर की शटरिंग खोलते समय स्टूल से गिरे मजदूर की मौत हो गई।परिजनों ने समय पर उपचार न मिलने की बात कही है। उन्होंने काम के दौरान सुरक्षा मानकों का ध्यान न रखने का भी आरोप लगाया है।
रम्पुरारतन गांव निवासी नरेंद्र मौर्या (32) सुबह सात बजे अपने घर से मजदूरी करने के लिए फरीदपुर अड्डे पर आए थे। यहां से उन्हें लिंटर की शटरिंग खोलने के लिए चेयरमैन के निर्माणाधीन मकान पर ले जाया गया। यहां मोहल्ला ऊंचा निवासी मिस्त्री के साथ पांच लोग पहले से काम कर रहे थे। बताया जा रहा है कि नरेंद्र एक स्टूल पर चढ़े हुए थे। अचानक से पैर फिसलने की वजह से वह जमीन पर जा गिरे। गिरते ही वह अचेत हो गए।
साथ काम कर रहा मिस्त्री उन्हें लेकर एक निजी अस्पताल पहुंचा। दवा खाने के बाद वह फिर से काम पर लौट आए। परिजनों का आरोप है कि कुछ देर बाद ही उनकी तबीयत बिगड़ गई। शाम करीब चार बजे उन्हें सीएचसी ले जाया गया है। कुछ देर बाद ही नरेंद्र ने दम तोड़ दिया। हादसे के बाद उनकी पत्नी रीना का रो-रोकर बुरा हाल है। नरेंद्र के परिवार में बेटा अनस और दो बेटियां अनुष्का और परी हैं।
समय पर मिलता उपचार तो बच सकती थी जान
परिजनों का कहना है कि स्टूल से गिरने के बाद पहले कई घंटे तक उन्हें घर पर ही रखा गया। इसके बाद निजी अस्पताल से दवा दिला दी गई। तबीयत में सुधार न होने पर सीएचसी ले जाया गया। उन्होंने बताया कि हादसे के बाद तुरंत ही अगर नरेंद्र को अस्पताल ले जाया जाता तो उनकी जान बच सकती थी।
फैसले का दबाव बनाने का आरोप
परिजनों ने बताया कि नरेंद्र की मौत के बाद रुपये लेकर समझौता करने का दबाव बनाया जा रहा है। कुछ लोग पुलिस कार्रवाई न करने का दबाव बना रहे हैं। उन्होंने काम के दौरान सुरक्षा उपकरण न देने का आरोप लगाया है। कहा कि मजदूरों को सेफ्टी बेल्ट तक नहीं पहनाई गई। वहीं, जब इस मामले में चेयरमैन से बात की गई तो उन्होंने बताया कि ठेकेदार की ओर से काम कराया जा रहा था। उपचार के बाद नरेंद्र को घर नहीं लाया गया।