किसान शिशुपाल के खुदकुशी करने की खबर के बाद राजनेताओं तथा आसपास के गांवों के लोगों का मिलक मझारा गांव में जमावड़ा लगा रहा । वहां मौजूद हर व्यक्ति की जुबान पर पूर्व प्रधान के नेक इंसान होने की चर्चाएं रहीं । लोगों में जिला ग्रामोद्योग अधिकारी के खिलाफ जबरदस्त आक्रोश था। दोपहर में अत्येेष्टि की गई, इस दौरान लोगों की भीड़ लगी रही। आंवला के सांसद धमेंद्र कश्यप भी वहां पर काफी देर रहे और किसानों के खुदकुशी करने पर सरकार की आलोचना की।
आंवला के सांसद धर्मेंद्र कश्यप ने कहा कि अधिकारी थोड़े से भी सजग होते तो किसान खुदकुशी नहीं करता।इनकी आर्थिक स्थिति पहले बहुत अच्छी थी लेकिन किन्हीं कारणाें से फसल में नुकसान होने के चलते 35 हजार रुपये का लोन ग्रामोद्योग से मसाला चक्की लगाने के लिए लिया था। जिसका 74 हजार रुपये चुगता भी किया, फिर भी कर्जा निपटा नहीं। उल्टे सवा लाख रुपये की आरसी जारी हो गई। मौसम की मार ने फसल को नष्ट कर दिया। लेखपाल ने सही रिपोर्ट नहीं दी थी और पिछला बिजली का एक बकाया तीन से चार लाख रुपये भी निकल रहा था। सांसद ने कहा लगता है कि अधिकारी ने कहीं इनके साथ अभद्रता की थी, जिसके चलते इन्होंने कड़ा पत्र लिखा और आत्महत्या कर ली। सांसद ने इन्हें 50 लाख रुपये की आर्थिक सहायता की मांग प्रदेश सरकार से की है।
मृतक के रिश्ते के भतीजे सूबेदार एलएन राजपूत का कहना है कि 33 हजार रुपये के कर्जे का 74 हजार रुपये देने के बावजूद सवा लाख रुपया और निकाल दिया। यह तो सूदखोराें से भी ज्यादा की ब्याज हो गया। यही उनकी मौत का कारण रहा। कर्जे को कम कराने के लिए खादी ग्रामोद्योग अधिकारी और शासन में पहल की, लेकिन सुनवाई नहीं हुई। ऐसे में इनकी मौत के जिम्मेदार खादी ग्रामोद्योग अधिकारी रामरतन हैं।