बर्बाद फसल देख किसानों की मौत का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। बुधवार को भी महिला समेत चार और किसानों ने दम तोड़ दिया।
चार बीघा खेत से 50 किलो गेहूं निकलने पर हार्टअटैक
सेंथल। कस्बे में रहने वाले 60 वर्षीय मुनव्वर रजा चार बीघा जमीन में 50 किलो गेहूं निकलने से परेशान थे। उन्होंने डुवाबट गांव में फसल बोई थी। छोटे भाई आलिम रजा के अनुसार बुधवार को थ्रेसिंग के बाद गेहूं तोला गया तो सिर्फ पचास किलो दाने निकलने पर मुनव्वर बेहोश हो गए। उन्हें घर लाया गया। अचानक सीने में दर्द हुआ और कुछ ही देर में उनकी मौत हो गई। मुनव्वर का बेटा बीकॉम और बेटी इंटर में पढ़ रही है।
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कर्ज में डूबी महिला से नहीं देखी गई फसल की बर्बादी
देवरनियां। उदरा गांव में 60 साल की पार्वती कर्ज और फसल बर्बादी का सदमा बर्दाश्त नहीं कर पाई। सुबह खेत में गई थी। गेहूं की बालियां हाथ में रखीं तो गश खाकर गिर गईं। पति जानकी प्रसाद की चार साल पहले मौत हो जाने के बाद 16 बीघा जमीन पार्वती के नाम ही थी। उसने दस बीघा जमीन पर गन्ना लगाया था। छह बीघा में गेहूं फसल बोई थी। उन पर एसबीआई बहेड़ी और बैंक ऑफ बड़ौदा देवरनियां का करीब एक लाख 30 हजार रुपये का कर्ज था।
बाबू को अपनी और ठेके की फसल धोखा दे गई
फरीदपुर। लौंगपुर गांव के 60 साल के बाबू के घर कोहराम मचा है। अपनी चार बीघा जमीन और ठेके में ली गई 18 बीघा जमीन में चार क्विंटल चालीस किलो गेहूं निकलने पर उसकी हिम्मत जवाब दे गई। पहले से ही कर्ज में डूबे बाबू को खेत से लौटने पर हार्टअटैक पड़ा तो वह उठ नहीं सका। बाबू के पांच बच्चे हैं। बड़े परिवार का गुजारा ठीक से हो सके इसलिए उसने 18 बीघा खेती ठेके पर ले ली थी मगर मौसम ने सभी सपने तोड़ दिए। उसने गांव वालों से 70 हजार रुपये कर्ज लेकर फसल पर लगाया था। बर्बाद फसल का सर्वे न होने पर भी वह टेंशन में रहता था।
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36 साल का सत्यपाल भी टूट गया
भुता। बड़ी उम्मीद के साथ रिछा गांव के 36 साल के सत्यपाल मौर्य ने गेहूं की फसल तैयार की थी। ओलावृष्टि और बारिश से फसल बर्बाद हुई तो वह टूट गया। बुधवार को हार्टअटैक पड़ा। घर वाले कुछ समझ पाते इससे पहले ही उसने दम तोड़ दिया। सत्यपाल ने पांच बीघा जमीन में गेहूं बोया था लेकिन बालियां काली पड़ गई थीं। वह टेंशन में था। बुधवार को खेत से लौटा तो दो बजे बेचैनी की शिकायत की। घर वालों ने बताया कि वह बार-बार ग्रामीणों से लिए 20 हजार रुपये चुकाने और 18 साल की इकलौती बेटी पिंकी की शादी की बात कह रहा था। घर वालों ने सब ठीक हो जाने की बात कही मगर उसके प्राण पखेरू उड़ गए। पत्नी ने बताया कि पिता की मौत के बाद घर की जिम्मेदारी उसी पर थी। मेहनत मजदूरी कर वह परिवार का पालन पोषण करता था।