दस बीघा की फसल में सिर्फ पांच क्विंटल गेहूं निकलने के सदमे में खुद को आग लगाने वाले किसान गोविंद के इलाज में 12 घंटे में ही 70 हजार रुपये फुंक गए। उसके पिता ने अस्पताल में जैसे-तैसे 40 हजार रुपये जमा किए। अब बाकी 30 हजार रुपये के लिए नाते-रिश्तेदारों का दरवाजा खटखटा रहे हैं।
सिरौली के गांव बिहारीपुर निवासी 35 वर्षीय गोविंद ने रविवार की शाम सवा सात बजे खेत से लौटकर खुद को कमरे के अंदर बंद कर मिट्टी का तेल छिड़ककर आग लगा ली थी। पहले उसे जिला अस्पताल लाया गया। वहां इलाज की सुविधा न होने पर परिवार वाले उसे लेकर ईशान अस्पताल आए। यहां रात करीब एक बजे उसे भर्ती किया गया। सोमवार दोपहर उसके पिता सुरेंद्र पाल ने बताया कि 12 घंटे में ही गोविंद के इलाज में 70 हजार रुपये लग गए हैं। 40 हजार रुपये तो उन्होंने जमा कर दिए हैं। शेष रकम जमा करने के लिए अस्पताल ने उन्हें शाम तक का समय दिया है। इसका इंतजाम करने के लिए वह नाते रिश्तेदारों और साहूकारों से संपर्क कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि गोविंद उनका इकलौता बेटा है। उसे बचाने के लिए अगर उन्हें अपनी 33 बीघा जमीन बेचनी पड़ी तो बेच देंगे।
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दो लाख की मदद को लिखेगा प्रशासन
सोमवार को आंवला के एसडीएम और तहसीलदार ईशान अस्पताल में भर्ती गोविंद का हालचाल लेने पहुंचे। उन्होंने पीड़ित परिवार को हर संभव मदद का आश्वासन दिया। एसडीएम आंवला आर्यका अखौरी ने बताया कि पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता मुहैया कराने के लिए शासन को मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष से दो लाख रुपये दिलाने की डीएम के माध्यम से सिफारिश भेजी है। उधर जिला प्रशासन का कहना है कि एसडीएम आंवला की रिपोर्ट का इंतजार है। एसडीएम की रिपोर्ट मिलने के बाद ही मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष से इलाज के लिए दो लाख रुपये की सहायता के लिए लिखा जाएगा।
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चेस्ट के साथ किडनी-हार्ट पर भी असर
आग लगाने के बाद शाम सवा सात बजे से 12 बजे तक गोविंद को कोई इलाज नहीं मिला। आधी रात के बाद जब उसे अस्पताल लाया गया तो मैंने उसका इलाज शुरू किया। समय से इलाज होता तो शायद गोविंद को जल्द स्वास्थ्य लाभ होता। गोविंद का शरीर भुट्टे की तरह भुन गया है । उसके चेस्ट के साथ हार्ट और किडनी पर भी असर पड़ा है। हालत नाजुक है। -डॉ.कौशल, ईशान अस्पताल