Kidney disease in children is rising
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किडनी की समस्या ऐसी है जो बड़ों में ही नहीं बल्कि बच्चाें में भी बढ़ रही है। जब तक इस बीमारी को चिकित्सक समझ पाते हैं तब तक काफी देर हो चुकी होती है। इसी तरह बच्चों के फेफड़े से जुड़ी बीमारी में भी डॉक्टर गंभीर नहीं होते। उनको अधिक सफाई से बीमारी का पता लगाने के लिए स्कैन और एमआरआई करानी पड़ती है। जबकि बिना इसके भी काम चल सकता है। बच्चाें से जुड़ी ऐसी ही बीमारियों और उनके निदान पर एसआरएमएस इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज में पीडियाट्रिक अपडेट का आयोजन किया गया। देश भर से आए बाल रोग विशेषज्ञों ने अपनी राय और बात रखी। मेडिकल छात्रों को भी बच्चों के इलाज में ध्यान देने को कहा।
आरएनआर आर्मी हॉस्पिटल नई दिल्ली के डॉ. एसके पटनायक ने बताया कि बच्चों में किडनी की बीमारी के कई कारण हैं, लेकिन इसे लक्षण दिखने के बाद पता करने से अच्छा है कि पहले ही पहचान लिया जाए। इसके लिए जांच जरूरी है ताकि इलाज शुरू हो सके। सर गंगाराम के डॉ. धीरेंद्र गुप्ता ने बताया कि फेफड़ों से जुड़ी बीमारियों के लिए अगर एक्सरे ही ठीक से देखा जाए तो एमआरआई और अन्य जांच कराने की जरूरत नहीं पड़ेगी। इंडियन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अनुपम सचदेवा ने नवीन जानकारी से अवगत कराया। इस मौके पर चेयरमैन देवमूर्ति, प्राचार्य डॉ. आरसी पुरोहित, डॉ. अतुल अग्रवाल, पीएल प्रसाद, डॉ. सुरभि चंद्रा, एनबी माथुर व अन्य का शामिल रहे।
- बच्चों की बीमारी में इसका भी ख्याल रखें डॉक्टर्स
लखनऊ से आई डॉ. पियाली भट्टाचार्य ने बताया कि आजकल डॉक्टरों पर हमले बढ़ते जा रहे हैं इसलिए अगर कोई गंभीर मामला आए तो अपने और मरीज के कागज तैयार करके रखे। डॉ. राना ने मेडिकल छात्रों को बताया कि वे कभी मरीज से बात नहीं करते और उनकी हिस्ट्री जानने में दिलचस्पी नहीं दिखाते हैं। इससे आगे चलकर उनकी पढ़ाई में समस्या आती है।