बरेली। किच्छा नदी में अवैध खनन को लेकर भाजपा के ही दो नेताओं के बीच टकराव के बाद अगर इंस्पेक्टर और क्षेत्रीय विधायक आमने-सामने न आए होते तो शायद यह किसी को पता ही नहीं चलता कि यहां नदी को किस कदर नुकसान पहुंचाकर करोड़ों की कमाई की जा रही है। इसी टकराव के कारण मामला शासन तक पहुंचा, फिर शासन से आई टीम ने जांच की तो अवैध खनन का सारा खेल खुल गया। खनन के पट्टों को निरस्त कर अफसरों ने अपनी गर्दन बचाने की कोशिश तो की है, लेकिन शासन की जांच में यह खुलासा हो ही गया है कि किच्छा नदी में खनन क्षेत्र का सीमांकन कर पिलर तक नहीं लगाए गए थे। यह जिम्मेदारी खनन अधिकारी और एसडीएम की थी, जिसे पूरा न किए जाने की वजह से ही यहां बड़े पैमाने पर अवैध खनन किया गया। नेताजी की वजह से अफसरों ने एनजीटी की गाइड लाइन तक की परवाह नहीं की। जांच करने वाली शासन की टीम की संस्तुति पर खनन अधिकारी अनुराग श्रीवास्तव को तो यहां से हटा दिया गया, लेकिन प्रशासन के अफसरों की जवाबदेही सुनिश्चित नहीं की गई।
जिला प्रशासन ने बहेड़ी में मोहम्मदपुर और टियूला गांव से गुजरने वाली किच्छा नदी में खनन करने के दो पट्टे दिए थे। इन्हीं पट्टों की आड़ में यहां जमकर अवैध खनन किया जा रहा था। अफसर खनन पर कितना मेहरबान थे, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि पट्टेदारों ने तीन महीने से रायल्टी तक जमा नहीं की थी। इसके बावजूद खनन रोका नहीं गया था। खनन के इस खेल में सत्ताधारी नेताओं के साथ पुलिस-प्रशासन के अफसर भी शामिल थे। अंधाधुंध अवैध खनन की शिकायत पर शासन ने आई टीम ने जांच की तो अफसरों का खेल खुल गया। जांच रिपोर्ट में जिक्र है कि खनन की सीमा तय करने के लिए प्रशासन ने पैमाइश कराकर सीमांकन के लिए पिलर तक लगाने की जिम्मेदारी नहीं निभाई थी। इसी कारण पट्टे की आड़ में मोहम्मदपुर में करीब 7500 घनमीटर बालू का अवैध खनन किया गया जबकि एमएल-11 पोर्टल पर पट्टाधार की 6616 घनमीटर बालू निकासी की मात्रा पाई गई। इससे साफ हो गया कि यहां अवैध रूप से 884 घनमीटर अवैध खनन किया गया था।
शासन की टीम की जांच में यह भी खुलासा हुआ कि किच्छा नदी के किनारे तीन सेडिमेंटेशन टैंक थे जिसमें नियम-कायदों को ताक पर रखकर नदी की जलधारा की मध्य गहराई से पाइप की मदद से बालू को खींचकर भरा जा रहा था। इसके साथ अवैध तरीके से रेत निकालने के लिए लिफ्टर का भी इस्तेमाल किया जा रहा था। जांच के दौरान प्रतिबंधित होने के बावजूद दो पोकलेन मशीनें नदी किनारे खड़ी मिली थीं। जिन्हें कोतवाली पुलिस के सुपुर्द किया गया था। इन्हीं मशीनों को गैरकानूनी तरीके से मंगलवार को माफिया के सुपुर्द करने की कोशिश की गई। ऐन मौके पर भेद खुला तो मामला रफादफा कर दिया गया।
सिर्फ मोहम्मदपुर के पट्टाधारक पर जुर्माने का नोटिस
शासन की टीम ने मोहम्मदपुर और टियूला दोनों ही गांवों में अवैध खनन पकड़ा था लेकिन खनन अधिकारी की तरफ से अभी सिर्फ मोहम्मदपुर के पट्टाधारक पर जुर्माने के लिए नोटिस देने की कार्रवाई की जा रही है। टियूला के पट्टेधारक पर अभी कोई कार्रवाई नहीं हुई है। खनन अधिकारी का कहना है कि नोटिस जारी होने के एक माह के अंदर पट्टेधारक को जवाब देना होगा।
जिस जगह पर अवैध खनन हो रहा था कि वहां पट्टा नहीं था। इसलिए वहां सीमा स्तंभ लगे होने का सवाल ही नहीं है। हालांकि जिस जगह पर पट्टा आवंटित था, वहां पिलर लगाए गए थे या नहीं, इस बारे में भी मुझे कोई जानकारी नहीं है। - ममता मालवीय, एसडीएम बहेड़ी