बरेली। प्रशासन को रॉयल्टी जमा करने को दिए 15.58 लाख के चेक के बाउंस होने का मामला कोर्ट पहुंच गया है। खनन अधिकारी का कहना है कि अब अदालत ही इस मामले में कार्रवाई के आदेश करेगी।
बहेड़ी के ग्राम मोहम्मदपुर में हर साल 17712 घनमीटर बालू का खनन करने के लिए प्रशासन ने पांच साल का पट्टा आवंटित किया है। पट्टाधारक ने पहली अप्रैल से बकाया रॉयल्टी की 15,58,656 रुपये की रकम जमा ही नहीं की थी। इस पर पट्टाधारक को जब खनन विभाग की तरफ से नोटिस जारी हुआ तो पट्टाधारक कंपनी के पार्टनर दलजिंदर सिंह ने 11 जून को रॉयल्टी की बकाया रकम जमा करने के लिए चेक दिया था। खनन विभाग के स्टाफ ने इस चेक को 25 जून को एसबीआई की मेन ब्रांच में जमा किया, लेकिन 26 जून को बैंक ने यह कहते हुए चेक वापस कर दिया कि खाते में पर्याप्त राशि नहीं है।
इस पर जिला खनन अधिकारी कमल कश्यप ने पट्टेधारक को एक सप्ताह के अंदर जवाब देने को कहते हुए कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी थी। यह समय सीमा बीतने के साथ ही यह प्रकरण कोर्ट में चला गया है। खनन अधिकारी का कहना है कि कोर्ट के आदेश के बाद पट्टाधारक पर कानूनी कार्रवाई होगी।
अवैध खनन के मामले में फंसे पट्टाधारकों पर नहीं हुई कार्रवाई
बहेड़ी की किच्छा नदी में खनन पट्टों की आड़ में अंधाधुंध अवैध खनन किया गया था। कुछ नेता और अधिकारियों की सांठगांठ से यह खेल चल रहा था, लेकिन इंस्पेक्टर बहेड़ी और विधायक छत्रपाल सिंह के बीच खनन को लेकर खींचतान के बाद अवैध खनन का पर्दाफाश हो गया। स्थानीय प्रशासन ने इस पूरे मामले को दबाने की कोशिश की। मोहम्मदपुर और टियूला के पट्टाधारकों पर केवल तीन माह से रॉयल्टी न जमा करने के मामले में नोटिस जारी किया गया। यह मामला शासन में पहुंचने के बाद लखनऊ से आई टीम ने मौका मुआयना किया तो यह देखकर दंग रह गई कि खनन के लिए पोकलेन सहित कई प्रतिबंधित मशीनों का इस्तेमाल हो रहा था। खनन के लिए प्रशासन ने सीमांकन भी नहीं किया था। शासन ने पट्टाधारकों के पट्टा निरस्त करने और जुर्माने के आदेश दिए थे, लेकिन यह कार्रवाई अब तक नहीं हुई है।
रॉयल्टी का चेक बाउंस होने के मामले में पट्टाधारक पर कोर्ट के आदेश पर कार्रवाई होगी। अवैध खनन के मामले में पट्टाधारक को नोटिस दिया गया है। तय समय सीमा के बाद उन पर एक्शन लिया जाएगा।
-कमल कश्यप, जिला खनन अधिकारी