फरीदपुर। फरीदपुर की कटरी के गांव रायपुर हंस में सोमवार सुबह एडीएम प्रशासन रितु पूनिया के नेतृत्व में तहसील की टीम पहुंची। अधिकारियों ने चकबंदी के फायदे समझाकर अपने सामने ही ग्राम सभा से चकबंदी का प्रस्ताव पारित करा दिया। हालांकि ज्यादातर किसानों ने प्रस्ताव का यह कहकर विरोध किया कि चकबंदी के बहाने पैमाइश रोकने की तैयारी है और सिर्फ वक्त की बरबादी है।
एडीएम प्रशासन के साथ एसडीएम फरीदपुर पारुल तरार, तहसीलदार शेर बहादुर सिंह ने गांव में चकबंदी कराने का प्रस्ताव लिखवाकर कुछ ग्रामीणों से हस्ताक्षर कराकर पारित करवा दिया। प्रधान समेत कुछ ही ग्रामीणों ने इसका समर्थन किया। अधिकांश ग्रामीणों ने इस पर ऐतराज जताया। उनका आरोप है कि किसानों की जमीन जिन लोगों के कब्जे में है और वह उस जमीन में फसल बोते हैं, उन्हीं लोगों ने चकबंदी कराने के प्रस्ताव पर सहमति दी है। वह चाहते हैं कि चकबंदी में मामला फंसने पर फिर बरसों तक वह इन जमीनों पर काबिज रह सकेंगे, वर्ना उन्हें अभी जमीन खाली करनी पड़ जाएगी।
जमीन की नपत टालने की कोशिश
किसानों ने बताया कि तहसील प्रशासन अच्छी तरह जानता है कि रामगंगा की वजह से चकबंदी नहीं हो सकती है। क्योंकि नियमानुसार जिस गांव के रकबे या आसपास नदी बहती है, वहां चकबंदी नहीं हो सकती। किसानों के मुताबिक चकबंदी विभाग भी किसानों का रकबा पूरा नहीं कर सकता, क्योंकि जो जमीन नदी में या उसके पार है, उसे पूरा करना संभव नहीं है। पूरी कोशिश आम किसानों की जमीन की नपत को टालने की है। जब तक राजस्व विभाग से चकबंदी विभाग को कागजातों का हस्तांतरण होगा, काफी समय बीत जाएगा और तहसील के मौजूदा अधिकारियों की जगह नए अधिकारी आ जाएंगे।
नेताओं के दबाव में पैमाइश टालने का आरोप
रायपुर हंस गांव के श्रवण कुमार ने बताया कि गांव में करीब 16 हेक्टेयर सरकारी जमीन है। कुछ रेगिस्तान के नाम और कुछ बंजर भूमि के नाम पर दर्ज है। इस पर दबंगों की गेहूं व मटर की फसल खड़ी है। तहसील प्रशासन ने तो सरकारी जमीन भी पूरी तरह खाली नहीं कराई है। जबकि किसान सरकारी जमीन खाली कराने की मांग कर रहे हैं। ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि तहसील प्रशासन सत्ताधारी नेताओं के दबाव में गांव में पैमाइश करना नहीं चाहता है। उन्हें कभी कोर्ट के जरिये तो कभी चकबंदी के बहाने टाला जा रहा है।
वर्जन
गांव के लोगों की सहमति से चकबंदी कराने का प्रस्ताव पारित कर दिया गया है। चकबंदी होगी तो खुद ही किसानों को उनकी जमीन पर हक मिल जाएगा। - शेर बहादुर सिंह, तहसीलदार फरीदपुर